पुणे. डिजिटल इंडिया और ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के दौर में जहां लोग कैब और ऑटो बुकिंग को सुरक्षित, पारदर्शी और समय बचाने वाला विकल्प मानते हैं, वहीं पुणे से सामने आई एक घटना ने इस भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहर में रैपिडो जैसे ऐप आधारित ऑटो प्लेटफॉर्म पर एक नया ठगी पैटर्न सामने आया है, जिसमें ड्राइवर ऐप पर दिखाई गई कीमत को नजरअंदाज कर यात्रियों से मीटर के हिसाब से ज्यादा किराया वसूलने की कोशिश कर रहे हैं. यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर सामने आया, जहां एक यूजर ने अपने साथ हुई पूरी घटना विस्तार से साझा की, जिसके बाद यह चर्चा तेजी से फैल गई.
घटना के अनुसार, पुणे के एक नागरिक ने पहले कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन समय अधिक लगने के कारण उन्होंने ऑटो बुक करना बेहतर समझा. ऐप पर ऑटो तुरंत मिल गया और बुकिंग कन्फर्म हो गई. बुकिंग के कुछ ही पलों बाद ड्राइवर का कॉल आया, जिसमें उसने यात्री से राइड कैंसिल न करने को कहा. उस समय ड्राइवर ऐप के अनुसार केवल दो मिनट की दूरी पर बताया जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसे मौके पर पहुंचने में करीब दस मिनट लग गए. यहीं से यात्री को संदेह होने लगा, लेकिन असली झटका तब लगा जब ड्राइवर ने सवारी शुरू होने से पहले ही यह कह दिया कि वह किराया मीटर से ही लेगा.
यात्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह वही भुगतान करेगा जो ऐप में दिखाया गया है, क्योंकि उसने कम कीमत देखकर ही बुकिंग की थी. ऐप पर दिखाई गई राशि करीब 240 रुपये थी, जबकि ड्राइवर ने मीटर के हिसाब से लगभग 300 रुपये की गणना कर दी. काफी बहस और मोलभाव के बाद मामला 280 रुपये पर जाकर रुका. यात्री का कहना है कि अगर ड्राइवर ने कॉल पर ही साफ कर दिया होता कि वह मीटर से चार्ज करेगा, तो वह तुरंत राइड कैंसिल कर देता और उसी कीमत में किसी अन्य ऑटो या कैब से यात्रा कर लेता. असली नुकसान अतिरिक्त पैसे का नहीं, बल्कि समय की बर्बादी और मानसिक असुविधा का था.
इस घटना को लेकर यात्री ने रेडिट पर लिखा कि यह उनके 10–11 ऐप राइड्स के अनुभव में पहली बार हुआ है, जब इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा. हैरानी की बात यह भी रही कि संबंधित ड्राइवर की ऐप पर रेटिंग 4.8 स्टार थी, जो आमतौर पर भरोसे का संकेत मानी जाती है. इस वजह से मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि उच्च रेटिंग वाले ड्राइवर से ऐसी हरकत की उम्मीद कम ही की जाती है. सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के बाद कई अन्य यूजर्स ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिनमें कुछ ने बताया कि पुणे में ऐप आधारित ऑटो और कैब सेवाओं पर इस तरह के विवाद धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं.
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामने आ रही प्रतिक्रियाओं से साफ है कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि एक उभरता हुआ ट्रेंड हो सकता है. कई यूजर्स का कहना है कि कुछ ड्राइवर जानबूझकर ऐप पर कम कीमत वाली राइड स्वीकार कर लेते हैं और बाद में मौके पर पहुंचकर मीटर या नकद भुगतान की शर्त रख देते हैं. इस स्थिति में यात्री के सामने दो ही विकल्प बचते हैं—या तो अतिरिक्त पैसा दे या फिर समय और मेहनत गंवाकर दूसरी सवारी तलाशे. खासकर पीक आवर्स या आपात स्थितियों में यात्री मजबूरी में अतिरिक्त भुगतान कर देता है, जिसे ड्राइवर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
यात्री ने अपनी पोस्ट के माध्यम से अन्य लोगों को सतर्क करते हुए सलाह दी कि राइड कन्फर्म होने के बाद ड्राइवर को कॉल कर किराया और भुगतान के तरीके की स्पष्ट पुष्टि जरूर कर लें. चाहे भुगतान ऐप के जरिए हो या मीटर से, इस पर पहले ही सहमति बनाना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि समस्या अतिरिक्त पैसे की नहीं, बल्कि ड्राइवर के “स्कैम माइंडसेट” की है, जो जानबूझकर यात्री का समय खराब करता है और मजबूरी का फायदा उठाता है.
इस पूरे मामले ने ऐप आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. यात्रियों का मानना है कि यदि ऐप पर बुकिंग के समय एक तय किराया दिखाया जा रहा है, तो ड्राइवर को उसी का पालन करना चाहिए. मीटर चार्ज या अतिरिक्त रकम की मांग न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती है. कुछ यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में ऐप कंपनियों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें ड्राइवर की रेटिंग घटाना, चेतावनी देना या बार-बार शिकायत मिलने पर अकाउंट सस्पेंड करना शामिल हो.
पुणे जैसे महानगर में, जहां बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स, छात्र और नौकरीपेशा लोग रोजाना ऐप आधारित परिवहन पर निर्भर हैं, इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं. समय की कीमत महानगरों में सबसे ज्यादा होती है, और यदि वही समय इस तरह की चालबाजियों में बर्बाद हो, तो यात्रियों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है. सोशल मीडिया पर चर्चा के बाद यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि सार्वजनिक चेतावनी बन चुका है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. राइड शुरू होने से पहले ऐप में दिखाई गई कीमत का स्क्रीनशॉट लेना, कॉल पर बातचीत रिकॉर्ड करना और किसी भी तरह की अनियमितता होने पर तुरंत ऐप के सपोर्ट सिस्टम में शिकायत दर्ज कराना जरूरी है. साथ ही, प्लेटफॉर्म कंपनियों को भी स्थानीय स्तर पर ड्राइवरों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने और सख्त मॉनिटरिंग की आवश्यकता है, ताकि ऐसे “मीटर बनाम ऐप” विवादों पर रोक लग सके.
पुणे में सामने आया यह मामला एक चेतावनी है कि डिजिटल सुविधा के साथ-साथ जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है. ऐप पर दिखाई गई रेटिंग और कीमत पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय यात्रियों को हर कदम पर सतर्क रहना होगा. यह घटना बताती है कि ठगी के तरीके समय के साथ बदल रहे हैं और अब वे टेक्नोलॉजी की आड़ में सामने आ रहे हैं. ऐसे में सतर्क यात्री ही सुरक्षित यात्री है, और समय रहते चेतावनी साझा करना ही इस तरह के स्कैम से बचने का सबसे प्रभावी तरीका बन सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

