-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* मौनी अमावस्या - 18 जनवरी 2026, रविवार
* अन्वाधान - 18 जनवरी 2026, रविवार
* इष्टि - 19 जनवरी 2026, सोमवार
* अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 18 जनवरी 2026 को 12:03 एएम बजे
* अमावस्या तिथि समाप्त - 19 जनवरी 2026 को 01:21 एएम बजे
* धर्मधारणा के अनुसार- अन्वधान और इष्टि अनिवार्य पर्व हैं.
* अन्वधान के दिन- एक दिन का उपवास रखा जाता हैं और इष्ट के दिन यज्ञ करते हैं.
* इस दिन भगवान श्रीविष्णु के भक्त उनका आह्वान करते हैं और व्रत कर उनकी पूजा करते हैं.
* धर्मग्रंथों में भगवान श्रीविष्णु का एक नाम यज्ञ है, इष्टि के दिन इन्हीं भगवान श्रीविष्णु के निमित्त यज्ञ किया जाता है.
* इस दिन प्रातःकाल पवित्र स्नान आदि करके साफ, स्वच्छ, धुले हुए वस्त्र धारण करें पूजा का संकल्प करें.
* भगवान श्रीविष्णु तथा श्रीलक्ष्मी की पूजा करें तथा श्रीविष्णु के महामंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, मंत्र से हवन करें.
* यथाशक्ति दान-पुण्य करें.
* यह पर्व भौतिक सुख और अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करनेवाला है, दुर्भाग्य दूर करके समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करनेवाला है!
मौनी अमावस्या... आत्मा-परमात्मा संवाद का सर्वश्रेष्ठ समय!
* वैसे तो माघ के महीने के प्रत्येक दिन को पवित्र स्नान, दानधर्म आदि के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है किन्तु इस दौरान आने वाली अमावस्या... मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है.
* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर गंगा मैया और देश के प्रमुख संगम की पवित्र नदियों का जल अमृत तुल्य होता है.
* इस अवसर पर श्रद्धालु मौन धारण करते हैं और अंतर्मन से धर्म चर्चा करते हैं!
* ऋषि-मुनियों जैसे आचरण के कारण ही यह अमावस्या... मौनी अमावस्या कहलाती है.
* मौन कटु वचन पर नियंत्रण का सर्वोत्तम मार्ग है इसलिए इस दिन मौन रहकर ईष्टदेव आराधना करनी चाहिए... यह आत्मा-परमात्मा के संवाद का सर्वश्रेष्ठ समय है!
* धर्मग्रंथों में मौनी अमावस्या के अवसर पर दान-पुण्य करने को बहुत ही अधिक शुभ फलदायी बताया है.
* मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रात:काल पवित्र तीर्थ स्थलों, पवित्र संगम पर स्नान किया जाता है.
* पवित्र स्नान के पश्चात तिल के लड्डू, वस्त्रादि का दान दिया जाता है.
* इस अवसर पर पितरों का तर्पण करने से उन्हें भी शांति-मोक्ष की प्राप्ति होती है.
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 18 जनवरी 2026
* दिन का चौघड़िया
उद्वेग - 07:21 से 08:42
चर - 08:42 से 10:03
लाभ - 10:03 से 11:24
अमृत - 11:24 से 12:46
काल - 12:46 से 02:07
शुभ - 02:07 से 03:28
रोग - 03:28 से 04:49
उद्वेग - 04:49 से 06:10
* रात्रि का चौघड़िया
शुभ - 06:10 से 07:49
अमृत - 07:49 से 09:28
चर - 09:28 से 11:07
रोग - 11:07 से 12:46
काल - 12:46 से 02:24
लाभ - 02:24 से 04:03
उद्वेग - 04:03 से 05:42
शुभ - 05:42 से 07:21
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
AajKaDin:18 जनवरी 2026, अन्वधान और इष्टिः भौतिक सुख और अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करनेवाला पर्व!
प्रेषित समय :22:00:16 PM / Sat, Jan 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

