गूगल ने जीमेल में लाया जनरेटिव एआई, उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता पर उठे गंभीर सवाल

गूगल ने जीमेल में लाया जनरेटिव एआई, उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता पर उठे गंभीर सवाल

प्रेषित समय :15:48:56 PM / Sat, Jan 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. तकनीकी दुनिया में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. गूगल ने अपने ईमेल प्लेटफॉर्म जीमेल में जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नए फीचर्स पेश किए हैं. इन फीचर्स के जरिए उपयोगकर्ता अब अपने ईमेल को संक्षेप में पढ़ सकते हैं, त्वरित उत्तर तैयार कर सकते हैं और ईमेल में वर्णित कार्यों की सूची भी बना सकते हैं. हालांकि, इस सुविधा के साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल भी उठ खड़े हुए हैं.

गूगल ने इस महीने से धीरे-धीरे इन नए टूल्स को जीमेल में रोलआउट करना शुरू कर दिया है. यह जनरेटिव एआई तकनीक पर आधारित है, जो कि चैटबॉट्स और अन्य संवादात्मक मशीन लर्निंग टूल्स में प्रयुक्त होती है. इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के ईमेल इनबॉक्स को अधिक व्यवस्थित करना और ईमेल लिखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है. कुछ फीचर्स मुफ्त में उपलब्ध हैं, जबकि कुछ के लिए प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेना होगा.

इन नए फीचर्स की मदद से उपयोगकर्ता अब सीधे प्रश्न पूछकर ईमेल खोज सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप टाइप कर सकते हैं “पिछले महीने मैं जिस जॉब रिक्रूटर से मिला था उसका नाम क्या है?” और गूगल तुरंत संबंधित ईमेल को खोजकर परिणाम दिखाएगा. इसके अलावा, गूगल इस वर्ष के अंत तक एक नए प्रकार का इनबॉक्स पेश करने की योजना भी बना रहा है, जो ईमेल में चर्चा किए गए कार्यों के आधार पर स्वचालित रूप से टू-डू लिस्ट तैयार करेगा.

ईमेल लिखने के कार्य में सुधार के लिए भी गूगल ने नए टूल्स पेश किए हैं. इनमें ऑटोमेटिक प्रूफरीडर शामिल है जो लिखे गए ईमेल में व्याकरण और वर्तनी की गलतियों को सुधारने में मदद करेगा. साथ ही, एआई जनरेटेड उत्तर बनाने की सुविधा भी उपयोगकर्ताओं को समय बचाने और संदेशों को प्रभावी ढंग से भेजने का अवसर देती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गूगल के लिए पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए बड़े बदलावों का एक हिस्सा है. लगभग दो साल पहले गूगल ने खोज परिणामों में एआई आधारित उत्तर दिखाना शुरू किया था, जिससे लोगों के सवालों के उत्तर तुरंत मिल जाते थे. अब जीमेल में एआई को शामिल कर कंपनी ईमेल उपयोग के अनुभव को पूरी तरह बदलने का प्रयास कर रही है.

हालांकि, इस बदलाव के साथ गोपनीयता को लेकर चिंता भी बढ़ गई है. विशेषज्ञ और सुरक्षा विश्लेषक बताते हैं कि ईमेल व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी का बड़ा स्रोत होते हैं. जब एआई इन्हें पढ़कर संक्षेप तैयार करता है या उत्तर सुझाता है, तो यह सवाल उठता है कि उपयोगकर्ता का डेटा किस हद तक सुरक्षित है और इसे किस प्रकार इस्तेमाल किया जा रहा है.

गोपनीयता के सवालों के अलावा डेटा एक्सेस को लेकर भी चर्चा चल रही है. यह जानना जरूरी है कि एआई कैसे ईमेल के अंदर की सामग्री का विश्लेषण करता है और क्या कोई थर्ड पार्टी इस डेटा तक पहुंच सकती है. उपयोगकर्ता समूह और गोपनीयता विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि गूगल को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि डेटा संग्रह, भंडारण और उपयोग की नीति क्या होगी.

टेक उद्योग में इसके संभावित प्रभावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. अगर उपयोगकर्ता बड़े पैमाने पर एआई टूल्स का उपयोग करते हैं, तो इससे ईमेल की प्रबंधन प्रक्रिया और कार्यकुशलता में सुधार हो सकता है. वहीं, कुछ आलोचक इसे निजता का उल्लंघन मान रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग के मामले भी सामने आ सकते हैं.

गूगल के प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उपयोगकर्ता की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने यह भी बताया कि एआई टूल्स को डिज़ाइन करते समय डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है. कंपनी ने यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत ईमेल डेटा को बिना अनुमति के किसी अन्य स्थान पर साझा नहीं किया जाएगा और एआई केवल उपयोगकर्ता के इनबॉक्स में ही डेटा का उपयोग करेगा.

इस नई सुविधा से ईमेल का उपयोग करने वालों को कई फायदे मिल सकते हैं. बिजनेस प्रोफेशनल्स, कंटेंट क्रिएटर्स, छात्र और अन्य पेशेवर लोग समय की बचत कर सकते हैं, ईमेल संचार को अधिक प्रभावी बना सकते हैं और अपने कार्यों को संगठित तरीके से प्रबंधित कर सकते हैं.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उपयोगकर्ता को सतर्क रहना चाहिए और संवेदनशील जानकारी साझा करने में सावधानी बरतनी चाहिए. एआई आधारित टूल्स जितने भी स्मार्ट और उपयोगी हों, उनके साथ संभावित जोखिम भी जुड़े होते हैं. इसलिए व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी के लिए हमेशा सुरक्षित उपाय अपनाना आवश्यक है.

अंततः गूगल का यह कदम तकनीकी दुनिया में ईमेल अनुभव को नया रूप देने का प्रयास है. जनरेटिव एआई के माध्यम से ईमेल संचार को आसान और प्रभावी बनाया जा सकता है, लेकिन गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना भी उतना ही जरूरी है. उपयोगकर्ताओं और विशेषज्ञों की निगरानी यह तय करेगी कि यह नवाचार कितनी सुरक्षित और प्रभावशाली साबित होता है.

गूगल की नई पहल यह दिखाती है कि भविष्य में एआई और मानव संवाद का संगम किस दिशा में जा सकता है. अगर सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह न केवल ईमेल प्रबंधन को आसान बनाएगा, बल्कि कार्यकुशलता और समय प्रबंधन में भी मदद करेगा. वहीं, गोपनीयता और सुरक्षा के सवालों को हल किए बिना यह सुविधा पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती.

गूगल की यह नई तकनीकी क्रांति निश्चित रूप से डिजिटल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला रही है. उपयोगकर्ताओं को यह समझना होगा कि सुविधा और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

इस बदलाव के साथ ही डिजिटल दुनिया में गोपनीयता और एआई का उपयोग एक बार फिर से मुख्य बहस का विषय बन गया है. जैसे-जैसे गूगल के नए टूल्स अधिक लोगों तक पहुंचेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा कि उपयोगकर्ता अनुभव और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है और क्या एआई आधारित ईमेल सेवा वास्तव में सुरक्षित और विश्वसनीय साबित होती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-