इंदौर.
न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने भारतीय सरज़मीं पर एक यादगार उपलब्धि हासिल करते हुए भारत को तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में 2–1 से मात दे दी है. रविवार, 18 जनवरी 2026 को इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए निर्णायक तीसरे वनडे में कीवी टीम ने भारत को 41 रन से हराकर सीरीज़ अपने नाम की. इस जीत के नायक रहे डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स, जिनकी ऐतिहासिक शतकीय पारियों और रिकॉर्ड साझेदारी ने मैच की दिशा ही बदल दी.
टॉस के बाद पहले बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही. महज़ पांच रन के स्कोर पर टीम के दो विकेट गिर चुके थे. हेनरी निकोल्स बिना खाता खोले और डेवोन कॉनवे सिर्फ पांच रन बनाकर पवेलियन लौट गए. शुरुआती झटकों के बाद ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज़ मैच पर पूरी तरह हावी हो जाएंगे, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया.
डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने चौथे विकेट के लिए 219 रन की विशाल साझेदारी कर भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया. मिचेल ने संयम और क्लास का शानदार प्रदर्शन करते हुए 137 रनों की पारी खेली, जबकि फिलिप्स ने आक्रामक अंदाज़ में 106 रन बनाकर भारतीय फील्डिंग और गेंदबाज़ी की कमज़ोरियों को उजागर किया. दोनों बल्लेबाज़ों ने 188 गेंदों में यह साझेदारी पूरी की, जो न्यूजीलैंड के वनडे इतिहास में चौथे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारियों में से एक बन गई.
मिचेल ने पारी को संभालते हुए स्ट्राइक रोटेशन और सटीक शॉट सिलेक्शन पर ध्यान दिया, वहीं फिलिप्स ने मध्य ओवरों में बड़े शॉट्स लगाकर रन गति को तेज़ किया. भारतीय गेंदबाज़ इस साझेदारी को तोड़ने के लिए लगातार बदलाव करते रहे, लेकिन कोई भी रणनीति काम नहीं आई. मध्य ओवरों में न्यूजीलैंड का रन रेट सात से ऊपर चला गया, जिसने भारत को बैकफुट पर धकेल दिया.
दोनों शतकवीरों के आउट होने के बाद भी न्यूजीलैंड की पारी नहीं रुकी. निचले क्रम के बल्लेबाज़ों ने अहम योगदान देते हुए स्कोर को 50 ओवर में 337 रन तक पहुंचा दिया. शुरुआती 5 रन पर दो विकेट गंवाने के बाद 337/8 तक पहुंचना न्यूजीलैंड की मानसिक मज़बूती और मैच टेम्परामेंट का प्रमाण रहा.
भारत की ओर से गेंदबाज़ों ने शुरुआत में प्रभाव छोड़ा, लेकिन मिचेल-फिलिप्स की साझेदारी के दौरान लय पूरी तरह खो दी. अंतिम ओवरों में विकेट तो गिरे, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था. बड़े लक्ष्य के सामने भारतीय गेंदबाज़ दबाव में नज़र आए और रन रोकने में असफल रहे.
338 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को अच्छी शुरुआत की दरकार थी, लेकिन कीवी गेंदबाज़ों ने सधी हुई और अनुशासित गेंदबाज़ी से भारत की उम्मीदों पर लगातार प्रहार किया. विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे और कोई भी बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी. रन रेट का दबाव बढ़ता गया और भारतीय बल्लेबाज़ जोखिम लेने को मजबूर होते चले गए.
न्यूजीलैंड के गेंदबाज़ों ने सही लाइन-लेंथ और फील्ड प्लेसमेंट के साथ भारत को लक्ष्य से दूर रखा. अहम मौकों पर विकेट लेकर उन्होंने मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और अंततः भारत को 41 रन से पराजित कर दिया.
यह सीरीज़ जीत न्यूजीलैंड के लिए बेहद खास मानी जा रही है. भारत जैसे मजबूत क्रिकेट राष्ट्र को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना आसान नहीं होता, और इंदौर जैसे बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर मैदान पर यह जीत कीवी टीम की अनुकूलन क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाती है. यह जीत भारतीय टीम के लिए भी आत्ममंथन का मौका है, खासकर मध्यक्रम की बल्लेबाज़ी और बड़े साझेदारियों को तोड़ने में गेंदबाज़ी रणनीति को लेकर.
कुल मिलाकर, इंदौर का यह मुकाबला डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स की शानदार बल्लेबाज़ी, न्यूजीलैंड की टीमवर्क भावना और दबाव में शांत रहने की क्षमता के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा. न्यूजीलैंड ने न सिर्फ मैच, बल्कि पूरी सीरीज़ में भारत को कड़ी चुनौती दी और अंततः इतिहास रचते हुए 2–1 से सीरीज़ अपने नाम कर ली.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

