नई दिल्ली. तेलंगाना की राजनीति में एक नई हलचल के संकेत मिल रहे हैं. देश के जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर के राज्यसभा सांसद कल्वकुंतला कविता की प्रस्तावित नई राजनीतिक पार्टी के साथ जुड़ने की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच लगातार संवाद चल रहा है और पार्टी के गठन, उसके वैचारिक ढांचे और कार्यशैली को लेकर कई दौर की गंभीर बातचीत हो चुकी है. यदि यह सहयोग औपचारिक रूप लेता है, तो इसे तेलंगाना की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जाएगा.
कल्वकुंतला कविता के कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर ने इस नए राजनीतिक मंच के प्रति गहरी रुचि दिखाई है. बताया जा रहा है कि तेलंगाना में एक ऐसे वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प की आवश्यकता पर दोनों की सोच काफी हद तक मेल खाती है, जो सीधे जनता से जुड़ा हो और पारंपरिक सत्ता संरचनाओं से अलग दिखाई दे. इसी साझा दृष्टिकोण के चलते प्रशांत किशोर और कविता के बीच बातचीत आगे बढ़ी है.
पिछले दो महीनों के भीतर प्रशांत किशोर ने हैदराबाद के दो दौरे किए, जिनमें दोनों नेताओं के बीच लंबी बैठकें हुईं. खास तौर पर संक्रांति पर्व के दौरान हुई मुलाकात को अहम माना जा रहा है, जब प्रशांत किशोर और कल्वकुंतला कविता ने करीब पांच दिनों तक विभिन्न मुद्दों पर गहन मंथन किया. इन चर्चाओं में प्रस्तावित पार्टी की वैचारिक दिशा, संगठनात्मक ढांचा, नेतृत्व की भूमिका और जमीनी स्तर पर पार्टी के संचालन जैसे विषय शामिल रहे.
सूत्रों के अनुसार, बातचीत का केंद्र बिंदु यह रहा कि तेलंगाना के लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ी एक ऐसी पार्टी कैसे बनाई जाए, जिसमें आम नागरिक खुद को भागीदार महसूस करे. चर्चा इस बात पर भी हुई कि पार्टी केवल चुनावी मंच न बनकर एक जन-आधारित आंदोलन के रूप में विकसित हो, जहां नीतियों और फैसलों में जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके.
बताया जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने अपने पिछले अनुभवों के आधार पर सहभागी राजनीति के कुछ मॉडल साझा किए. इन मॉडलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करना, स्थानीय स्तर पर मुद्दों की पहचान और समाधान, तथा डिजिटल और ऑफलाइन माध्यमों के जरिए जनता से निरंतर संवाद बनाए रखने जैसे सुझाव शामिल हैं. कल्वकुंतला कविता ने भी इन विचारों में रुचि दिखाई और उन्हें तेलंगाना की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालने पर सहमति जताई.
कल्वकुंतला कविता, जो पहले से ही महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दों पर मुखर रही हैं, एक नई राजनीतिक पहचान गढ़ने की दिशा में कदम बढ़ाती दिखाई दे रही हैं. सूत्रों का कहना है कि उनकी प्रस्तावित पार्टी तेलंगाना के युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीति गढ़ सकती है. इस संदर्भ में प्रशांत किशोर का अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण पार्टी को शुरुआती दौर में मजबूत आधार देने में सहायक हो सकता है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो यह केवल एक रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेलंगाना की राजनीति में एक नए प्रयोग की शुरुआत भी हो सकती है. प्रशांत किशोर अब तक विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी रणनीति के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने जन सुराज जैसे अभियानों के जरिए प्रत्यक्ष राजनीति और वैकल्पिक राजनीतिक सोच पर जोर दिया है. ऐसे में कविता की प्रस्तावित पार्टी के साथ उनका जुड़ाव इस दिशा में एक और कदम माना जा रहा है.
हालांकि, अभी तक इस संभावित सहयोग को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. न ही प्रशांत किशोर और न ही कल्वकुंतला कविता की ओर से सार्वजनिक रूप से इस बारे में कोई स्पष्ट बयान सामने आया है. इसके बावजूद, दोनों के बीच बार-बार हो रही मुलाकातों और लंबे विचार-विमर्श ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है.
तेलंगाना की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस तरह की पहल को काफी अहम माना जा रहा है. राज्य में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एक नई पार्टी का उभार समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. खासकर यदि वह पार्टी खुद को जन-केंद्रित और सहभागी राजनीति के मॉडल के रूप में स्थापित करने में सफल रहती है, तो वह पारंपरिक दलों के लिए चुनौती बन सकती है.
सूत्रों का यह भी कहना है कि बातचीत के दौरान संगठन के वित्तपोषण, पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. पार्टी को पारंपरिक सत्ता-संरचनाओं और परिवारवाद से अलग रखने पर विशेष जोर दिया गया. यह संकेत देता है कि प्रस्तावित पार्टी खुद को वैकल्पिक राजनीति के मंच के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर सकती है.
कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर और कल्वकुंतला कविता के बीच चल रही बातचीत ने तेलंगाना की राजनीति में संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं. आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह संवाद केवल विचार-विमर्श तक सीमित रहता है या एक ठोस राजनीतिक साझेदारी का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि इस संभावित सहयोग ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा और उत्सुकता पैदा कर दी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-


