दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह की टिप्पणी से मचा बवाल, जेन जी की भाषा के नाम पर यौन स्वास्थ्य पर बयान पड़ा भारी

दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह की टिप्पणी से मचा बवाल, जेन जी की भाषा के नाम पर यौन स्वास्थ्य पर बयान पड़ा भारी

प्रेषित समय :22:19:23 PM / Thu, Jan 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

दिल्ली में हाल ही में आयोजित एक कॉन्सर्ट के दौरान मशहूर रैपर और म्यूजिक प्रोड्यूसर यो यो हनी सिंह की टिप्पणी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मंच से दिए गए उनके एक बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद उनके शब्दों को लेकर तीखी आलोचना शुरू हो गई। हनी सिंह ने अपने बयान में दिल्ली की सर्दी का जिक्र करते हुए कार में सेक्स करने की बात कही और साथ ही कंडोम इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की ठंड में कार में सेक्स करना मजेदार होता है, लेकिन सुरक्षित रहना जरूरी है। उनके इस बयान को कई लोगों ने अश्लील, गैर-जिम्मेदाराना और सार्वजनिक मंच के लिए अनुपयुक्त करार दिया।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर बात करने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। खास तौर पर युवाओं और अभिभावकों ने नाराजगी जताई कि एक लोकप्रिय कलाकार, जिसे बड़ी संख्या में युवा फॉलो करते हैं, इस तरह के शब्दों के जरिए संदेश दे रहा है। आलोचकों का कहना था कि सुरक्षित सेक्स की बात करना जरूरी है, लेकिन उसका तरीका भी उतना ही अहम होता है।

विवाद बढ़ने के बाद हनी सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर माफी मांगी और अपने बयान को सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कॉन्सर्ट से पहले उन्होंने कुछ गायनेकोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट के साथ बातचीत की थी, जिन्होंने उन्हें बताया कि मौजूदा पीढ़ी में असुरक्षित यौन संबंधों के कारण यौन संचारित रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। हनी सिंह ने दावा किया कि उन्होंने जानबूझकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे जेन जी यानी वर्तमान युवा पीढ़ी आसानी से समझ सके। उनके मुताबिक, शॉक वैल्यू और बोल्ड शब्दों के जरिए ही आज के युवा गंभीर मुद्दों पर ध्यान देते हैं।

हालांकि, जेन जी से जुड़े कई युवाओं ने इस तर्क को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यौन स्वास्थ्य जैसे विषय पर स्पष्ट, सम्मानजनक और तथ्यात्मक भाषा ज्यादा प्रभावी होती है। नई पीढ़ी के युवाओं का मानना है कि वे खुले विचारों वाले जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे हर तरह की फूहड़ या अश्लील भाषा को स्वीकार करते हैं। कई छात्रों और युवा पेशेवरों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सुरक्षित सेक्स और यौन शिक्षा के लिए भरोसे और समझ की जरूरत होती है, न कि सनसनीखेज टिप्पणियों की।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर मशहूर हस्तियों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि कलाकारों की बातों का असर समाज पर गहरा पड़ता है, खासकर युवाओं पर। ऐसे में यदि संदेश का उद्देश्य सकारात्मक भी हो, तो उसकी प्रस्तुति गलत हो तो वह नुकसानदेह साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यौन स्वास्थ्य पर बातचीत जरूरी है, लेकिन उसे सही संदर्भ, सही भाषा और सही मंच पर किया जाना चाहिए।

सेक्सोलॉजिस्ट और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शॉक वैल्यू आधारित संवाद कुछ समय के लिए ध्यान जरूर खींच सकता है, लेकिन लंबे समय में यह भरोसे को कमजोर करता है। जब कोई सेलेब्रिटी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है, तो संदेश के बजाय शब्दों पर बहस शुरू हो जाती है और मूल मुद्दा पीछे छूट जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यौन शिक्षा में सबसे अहम तत्व सम्मान, स्पष्टता और वैज्ञानिक जानकारी होती है, न कि चौंकाने वाले बयान।

हनी सिंह का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारत में यौन स्वास्थ्य और सेक्स एजुकेशन पर खुलकर बात करने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में अब भी इस विषय को लेकर झिझक देखी जाती है, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधूरी या भ्रामक जानकारी आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में जब कोई लोकप्रिय चेहरा इस मुद्दे पर बोलता है, तो उससे जिम्मेदारी और संतुलन की अपेक्षा की जाती है।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि युवाओं तक पहुंचने के लिए भाषा को सरल और आधुनिक बनाया जा सकता है, लेकिन उसे अश्लील या असंवेदनशील नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि जेन जी सिर्फ बोल्ड भाषा से नहीं, बल्कि ईमानदार और भरोसेमंद संवाद से जुड़ती है। यदि उद्देश्य वास्तव में सुरक्षित सेक्स को बढ़ावा देना है, तो उसके लिए सही उदाहरण पेश करना ज्यादा जरूरी है।

वहीं, हनी सिंह के कुछ समर्थकों का कहना है कि उनके बयान को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने कम से कम सुरक्षित सेक्स और कंडोम के इस्तेमाल की बात तो की, जो अपने आप में एक सकारात्मक संदेश है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि संदेश की सकारात्मकता उसकी भाषा की जिम्मेदारी को खत्म नहीं करती।

इस विवाद ने मनोरंजन जगत और समाज के बीच की उस रेखा को फिर से उजागर कर दिया है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी आमने-सामने आ जाती हैं। सवाल यह नहीं है कि यौन स्वास्थ्य पर बात हो या नहीं, बल्कि यह है कि कैसे और किस तरह की भाषा में बात की जाए। जेन जी को समझने के नाम पर की गई यह कोशिश कई लोगों की नजर में नाकाम साबित हुई है।

अंततः यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक बहस को जन्म देता है कि आज के दौर में प्रभावशाली व्यक्तियों को सामाजिक मुद्दों पर बोलते समय कितनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। हनी सिंह का विवादित बयान भले ही कुछ लोगों को मनोरंजक या बेबाक लगे, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के लिए यह असहज और आपत्तिजनक रहा। यही कारण है कि जेन जी की भाषा बोलने का दावा करने वाली यह कोशिश खुद उसी पीढ़ी के कई युवाओं को रास नहीं आई।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-