आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना या थकान महसूस कर रही हैं, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में आयरन यानी लोहे की कमी एक साइलेंट महामारी की तरह फैल रही है, जिसके लक्षण बालों के झड़ने से लेकर मिट्टी या चाक खाने की अजीबोगरीब इच्छा तक फैले हुए हैं।
शरीर में आयरन की पर्याप्त मात्रा हीमोग्लोबिन बनाने के लिए अनिवार्य है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर के अंगों तक पहुंचाता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो मांसपेशियों की कार्यक्षमता घट जाती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था, स्तनपान और खान-पान में लापरवाही आयरन की कमी के मुख्य कारण हैं। सीके बिड़ला अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्री रोग निदेशक डॉ. तृप्ति रहेजा के अनुसार, आयरन की लंबे समय तक कमी एनीमिया का रूप ले लेती है, जिससे दैनिक जीवन के सामान्य कार्य करना भी मुश्किल हो जाता है।
आयरन की कमी को पहचानने के लिए 9 प्रमुख संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है, जिसमें पर्याप्त आराम के बाद भी बनी रहने वाली कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना और आंखों के नीचे काले घेरे शामिल हैं। इसके अलावा, थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, एकाग्रता में कमी, याददाश्त कमजोर होना और लगातार सिरदर्द इसके गंभीर लक्षण हैं। महिलाओं में अत्यधिक बालों का झड़ना, नाखूनों का चम्मच के आकार का होकर टूटना और हाथ-पैरों का हमेशा ठंडा रहना भी ऑक्सीजन के कम संचार की ओर इशारा करता है। सबसे अजीब लक्षण 'पिका' (Pica) है, जिसमें पीड़ित महिला को बर्फ, चाक, मिट्टी या क्ले जैसी चीजें खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। इसके साथ ही रात के समय पैरों में बेचैनी (Restless Leg Syndrome) भी आयरन की कमी का एक बड़ा संकेत है।
शोध बताते हैं कि भारी मासिक धर्म वाली महिलाएं, गर्भवती महिलाएं, किशोरियां और शाकाहारी आहार लेने वाली महिलाएं इस कमी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। इसके बचाव के लिए मेथी, दालें और चने जैसे आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। विशेषज्ञों की एक विशेष सलाह यह भी है कि आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए इसे विटामिन-सी युक्त फलों के साथ लें। यदि थकान और सांस फूलने जैसी समस्या बनी रहे, तो तुरंत सीरम फेरिटिन और हीमोग्लोबिन की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि केवल सप्लीमेंट लेना ही समाधान नहीं है, बल्कि कमी के मूल कारण जैसे फाइब्रॉएड या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं की पहचान करना भी उतना ही आवश्यक है। समय पर निदान न केवल एनीमिया से बचाता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।
शरीर में आयरन की कमी के संकेतों को न करें नजरअंदाज बाल झड़ने और थकान जैसी समस्याओं के पीछे छिपा हो सकता है एनीमिया का बड़ा खतरा
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

