हरियाणवी बोली, संस्कृति और लोक-जीवन को साहित्य के माध्यम से संरक्षित एवं समृद्ध करने के उद्देश्य से ‘म्हारी माटी, म्हारे आखर शीर्षक से हरियाणवी लघुकथाओं का एक विशेष संकलन तैयार किया जा रहा है. इस संकलन के लिए प्रदेश भर के रचनाकारों से शुद्ध हरियाणवी बोली में लिखी गई लघुकथाएँ आमंत्रित की गई हैं.
संकलन के संपादक डॉ. सत्यवान सौरभ एवं डॉ. प्रियंका सौरभ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पुस्तक में कुल 51 चयनित लघुकथाकारों की रचनाओं को स्थान दिया जाएगा. प्रत्येक रचनाकार तीन लघुकथाएँ भेज सकता है. प्रत्येक लघुकथा की अधिकतम शब्द-सीमा 150 शब्द निर्धारित की गई है, जबकि लेखक का संक्षिप्त परिचय 100 शब्दों में अनिवार्य रूप से भेजना होगा.
उन्होंने बताया कि भेजी जाने वाली सभी लघुकथाएँ शुद्ध हरियाणवी बोली में होनी चाहिए. चयनित लेखकों को पुस्तक की प्रकाशित कीमत पर 30 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी, हालांकि पुस्तक खरीदना अनिवार्य नहीं होगा.
यह लघुकथा-संग्रह हरियाणवी भाषा, संस्कृति और सामाजिक यथार्थ की सजीव अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने का एक सार्थक प्रयास होगा. इस संकलन के मार्गदर्शक प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ होंगे.
इच्छुक रचनाकार अपनी लघुकथाएँ यूनिकोड फॉन्ट में टाइप कर, अपनी फोटो के साथ ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं.
लघुकथाएँ भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है.
ई-मेल : [email protected]
संपर्क : 9466526148
हरियाणवी बोली की लघुकथाओं के लिए आमंत्रण
प्रेषित समय :20:55:03 PM / Thu, Jan 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

