ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर पाकिस्तान की फजीहत, इजराइल ने शहबाज शरीफ को बताया आतंकी समर्थक

ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर पाकिस्तान की फजीहत, इजराइल ने शहबाज शरीफ को बताया आतंकी समर्थक

प्रेषित समय :22:00:01 PM / Fri, Jan 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' चार्टर पर हस्ताक्षर करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए गले की हड्डी बन गया है. एक तरफ जहां पाकिस्तान को इस शांति योजना का हिस्सा बनने पर अपने ही देश में भारी विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद का समर्थक' बताते हुए किसी भी शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया है. इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री निर बरकत ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान जैसे देश, जो आतंकी विचारधाराओं का समर्थन करते हैं, उनका गाजा के भविष्य या शांति सेना में कोई स्वागत नहीं है. बरकत ने कतर और तुर्की के साथ पाकिस्तान का नाम लेते हुए कहा कि इजराइल इन देशों की सेनाओं को अपनी जमीन पर कभी स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि इनका झुकाव हमेशा जिहादी संगठनों की ओर रहा है.

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उन 20 से अधिक देशों के नेताओं में शामिल थे जिन्होंने ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण के तहत इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने भारत और चीन जैसी बड़ी शक्तियों सहित करीब 60 देशों को आमंत्रित किया था, लेकिन केवल मुट्ठी भर देशों ने ही इसमें रुचि दिखाई. इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर (करीब 8400 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम कीमत तय की गई है, जिसे कई विशेषज्ञ संयुक्त राष्ट्र (UN) के समानांतर एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने की ट्रंप की कोशिश के रूप में देख रहे हैं. इजराइल ने इस बोर्ड का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र को 'पक्षपाती' करार दिया है, लेकिन पाकिस्तान की भागीदारी पर उसका कड़ा रुख शहबाज शरीफ की कूटनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है.

पाकिस्तान के भीतर इस फैसले को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) ने शरीफ सरकार के इस कदम को फिलिस्तीनी हितों के खिलाफ और संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को खत्म करने वाला बताया है. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर देशव्यापी जनमत संग्रह (Referendum) की मांग की है. विपक्ष का तर्क है कि पाकिस्तान ने ऐसे चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं जो गाजा के लोगों की इच्छाओं के विरुद्ध है. सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इसे 'नैतिक रूप से गलत और अक्षम्य' करार दिया है. घरेलू राजनीति में घिरे शरीफ के लिए इजराइल की 'आतंक समर्थक' वाली टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की स्थिति एक बार फिर हास्यास्पद हो गई है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-