मनाली की बर्फबारी में बिकिनी पहनकर डांस करने वाली इन्फ्लुएंसर का के वीडियो पर नेटिजन्स बोले कुछ तो शर्म करो

मनाली की बर्फबारी में बिकिनी पहनकर डांस करने वाली इन्फ्लुएंसर का के वीडियो पर नेटिजन्स बोले कुछ तो शर्म करो

प्रेषित समय :22:07:39 PM / Fri, Jan 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मनाली. हिमाचल प्रदेश के मनाली में कड़कड़ाती ठंड और भारी बर्फबारी के बीच एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर द्वारा बिकिनी पहनकर डांस करने का मामला अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में इन्फ्लुएंसर मेघा रानी शून्य से नीचे के तापमान में बर्फ के बीच डांस करती नजर आ रही हैं. जैसे ही यह वीडियो इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही डिजिटल उत्तरदायित्व और सार्वजनिक शालीनता को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है. इंटरनेट यूजर्स का एक बड़ा वर्ग इस कृत्य को 'अश्लीलता' और 'अटेंशन पाने का हथकंडा' बता रहा है, जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला मानकर बचाव कर रहे हैं.

मनाली के एक प्रमुख पर्यटन स्थल पर फिल्माए गए इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोचकों का कहना है कि मनाली जैसे पारिवारिक हिल स्टेशन पर इस तरह का पहनावा और प्रदर्शन अनुचित है. लोगों का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर, जहां हर उम्र के पर्यटक और बच्चे मौजूद होते हैं, वहां स्थानीय सांस्कृतिक संवेदनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर 'कुछ शर्म करो' जैसे कमेंट्स की बाढ़ आ गई है, जिसमें लोगों ने इन्फ्लुएंसर्स को केवल व्यूज और लाइक्स के लिए किसी भी हद तक न जाने की सलाह दी है. वहीं, समर्थकों का तर्क है कि किसी महिला के कपड़ों को लेकर उसे जज करना 'मोरल पुलिसिंग' है और हर किसी को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का हक है.

कानूनी तौर पर देखा जाए तो फिलहाल स्थानीय प्रशासन या पुलिस की ओर से मेघा रानी के खिलाफ किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि मनाली में पर्यटकों के लिए कोई औपचारिक ड्रेस कोड लागू नहीं है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और शालीनता से जुड़े नियम अक्सर ऐसी स्थितियों में चर्चा का विषय बनते हैं. यह घटना उस समय सामने आई है जब हाल ही में हिमाचल में ही कुछ अन्य पर्यटकों द्वारा सार्वजनिक स्थान पर अभद्र व्यवहार के वीडियो भी वायरल हुए थे. डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि 'क्रिएटर इकोनॉमी' में अब 'शॉक वैल्यू' यानी चौंकाने वाली चीजें दिखाना एक ट्रेंड बन गया है, जिससे लोग रातों-रात मशहूर होने की कोशिश करते हैं, लेकिन इसके सामाजिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

मनाली का यह विवाद अब केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने इन्फ्लुएंसर की जिम्मेदारी और कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. क्या सार्वजनिक स्थलों पर अभिव्यक्ति की आजादी और स्थानीय संस्कृति के बीच कोई संतुलन होना चाहिए? यह सवाल अब पर्यटन स्थलों की प्रतिष्ठा और वहां आने वाले सैलानियों के आचरण को लेकर एक नई नीति की मांग कर रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-