अचला सप्तमी 2026: माघ शुक्ल सप्तमी पर सूर्य उपासना से मिटेगी दरिद्रता और मिलेगा आरोग्य का वरदान

अचला सप्तमी 2026: माघ शुक्ल सप्तमी पर सूर्य उपासना से मिटेगी दरिद्रता और मिलेगा आरोग्य का वरदान

प्रेषित समय :21:40:27 PM / Fri, Jan 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हिंदू धर्म और पुराणों में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है, और आगामी 25 जनवरी 2026, रविवार को पड़ने वाली माघ शुक्ल सप्तमी का दिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है. रविवार के दिन सप्तमी तिथि होने के कारण इसे 'विजय सप्तमी' के नाम से जाना जाता है, जिसे शास्त्रों में करोड़ों सूर्य ग्रहणों के समान फलदायी बताया गया है. इस दिन को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी और भानु सप्तमी जैसे कई नामों से पुकारा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र तिथि को भगवान सूर्य अपने दिव्य रथ पर पहली बार आरूढ़ हुए थे और इसी दिन जगत के रक्षक 'मार्तण्ड' का आविर्भाव हुआ था.

भविष्य पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, रथ सप्तमी पर किया गया दान, जप, होम और उपवास कभी क्षय नहीं होता यानी इसका फल अनंत काल तक मिलता रहता है. भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस तिथि की महिमा बताते हुए कहा है कि जो व्यक्ति विजय सप्तमी के दिन फल और पुष्पों से भगवान दिवाकर की प्रदक्षिणा करता है, उसे सर्वगुण संपन्न और उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है. संतान की रक्षा, लंबी आयु और कुल की उन्नति के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत रखना भी विशेष फलदायी माना गया है. यह तिथि भगवान सूर्य को इतनी प्रिय है कि उन्हें अपनी भार्या उत्तरकुरु और दिव्य स्वरूप भी इसी दिन प्राप्त हुआ था.

नारद पुराण के अनुसार, अचला सप्तमी को 'त्रिलोचन जयंती' के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन स्नान की एक विशेष विधि का उल्लेख है जिसमें अरुणोदय (सूर्योदय से पूर्व) के समय आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करने का विधान है. माना जाता है कि ऐसा करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है. अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं कि इस दिन अष्टदल या द्वादशदल कमल का निर्माण कर उसमें सूर्य देव की पूजा करने से मनुष्य समस्त शोकों से मुक्त हो जाता है.

शास्त्रों में इस दिन को 'सूर्य ग्रहण' के तुल्य पुण्यकारी बताया गया है. विशेषकर यदि माघ शुक्ल सप्तमी का यह अवसर प्रयाग के संगम तट पर प्राप्त हो जाए, तो इसका महत्व करोड़ों सूर्य ग्रहणों के समान हो जाता है. चंद्रिका और विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि अरुणोदय वेला में किया गया स्नान व्यक्ति को दरिद्रता से मुक्ति दिलाकर आयु, आरोग्य और अतुलनीय संपत्ति प्रदान करता है. भगवान सूर्य ने स्वयं वचन दिया है कि जो इस दिन विधिपूर्वक उनकी आराधना करेगा, वह उस पर प्रसन्न होकर अपने अंश से उसके पुत्र के रूप में अवतरित होंगे. अतः 25 जनवरी 2026 को इंद्रिय संयम के साथ उपवास रखकर सूर्य देव की पूजा करना और अगले दिन ब्राह्मणों को खीर-भात का भोजन कराना जीवन में सौभाग्य का उदय करने वाला सिद्ध होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-