जबलपुर. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शनिवार को ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भेड़ाघाट पहुंचे जहां उन्होंने मां नर्मदा के पावन तट सरस्वती घाट स्थित हरे कृष्णा आश्रम में हाजिरी लगाई। मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल प्रशासनिक और राजनैतिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बेहद खास रहा क्योंकि यहां उन्होंने एक जननायक के साथ-साथ एक अनन्य भक्त के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आश्रम पहुंचने के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर प्रांगण में स्थापित भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी रामचंद्र दास महाराज ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान किया। हालांकि यह एक धार्मिक कार्यक्रम था और इसकी आधिकारिक पुष्टि केवल मुख्यमंत्री के प्रवास प्रोटोकॉल के रूप में हुई है, लेकिन आश्रम के भीतर की गतिविधियों और मुख्यमंत्री के सहज अंदाज को लेकर अनौपचारिक सूत्रों और सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है।
इस दौरे का सबसे आकर्षक और चर्चा का विषय वह क्षण रहा जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूरी तरह भक्ति रस में डूबे नजर आए। मंदिर में दर्शन के पश्चात उन्होंने न केवल संतों का सत्संग सुना बल्कि स्वयं भी करताल उठाकर भजनों की प्रस्तुति दी। भक्ति में लीन मुख्यमंत्री का यह 'भजन अवतार' वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं था। देखते ही देखते इस भजन गायन का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल होने लगा जिसे लेकर डिजिटल गलियारों में तरह-तरह के विश्लेषण किए जा रहे हैं। यद्यपि सरकार की ओर से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह सादगीपूर्ण अंदाज जनता से सीधे जुड़ने की उनकी अनूठी शैली का हिस्सा है। भेड़ाघाट की वादियों में गूंजते इन भजनों ने न केवल वहां के वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया बल्कि सरकार और जनता के बीच के भावनात्मक सेतु को भी मजबूती प्रदान की।
राजनीतिक और सामाजिक चश्मे से देखें तो मुख्यमंत्री का हरे कृष्णा आश्रम पहुंचना और स्वामी रामचंद्र दास महाराज से आशीर्वाद लेना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय परंपराओं के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। जबलपुर का भेड़ाघाट क्षेत्र पहले से ही विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र है और मुख्यमंत्री के इस दौरे से सरस्वती घाट जैसे आध्यात्मिक स्थलों की ओर शासन का ध्यान और अधिक केंद्रित होने की संभावनाएं प्रबल हुई हैं। हालांकि प्रशासन ने इसे एक शिष्टाचार भेंट और धार्मिक आस्था का हिस्सा बताया है, परंतु विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान संतों से प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक उत्थान को लेकर भी अनौपचारिक चर्चा की है। इस प्रवास ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक राजनीति के व्यस्ततम समय के बीच भी वे अपनी जड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए समय निकालना नहीं भूलते।
मुख्यमंत्री का यह जबलपुर दौरा स्थानीय प्रशासन के लिए भी काफी व्यस्तता भरा रहा जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भेड़ाघाट के सरस्वती घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद मुख्यमंत्री ने जिस सहजता से भजन गाए, उसने सुरक्षा घेरे और पद की गरिमा के बीच एक मानवीय चेहरा प्रस्तुत किया है। वर्तमान में यह वीडियो इंटरनेट पर जबलपुर के सबसे ट्रेंडिंग विषयों में से एक बना हुआ है और लोग मुख्यमंत्री की गायन प्रतिभा और उनकी धार्मिक निष्ठा की सराहना कर रहे हैं। हालांकि पुलिस और जिला प्रशासन ने इस दौरे के सफल और शांतिपूर्ण संपन्न होने पर राहत की सांस ली है, लेकिन चर्चाओं का बाजार अभी भी मुख्यमंत्री के उस मधुर भजन को लेकर गर्म है जिसने आज संस्कारधानी की शाम को भक्तिमय बना दिया।
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