वाशिंगटन. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को लेकर एक अहम बयान जारी किया है. उन्होंने दावा किया है कि भारत के खिलाफ उठाया गया यह कदम अमेरिका के लिए काफी सफल साबित हुआ है, क्योंकि इसके चलते भारत द्वारा रूस से की जाने वाली तेल की खरीद में भारी गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, भारतीय व्यापरियों और सरकार के लिए राहत की खबर यह है कि बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि यह सख्ती हमेशा के लिए नहीं है और आने वाले समय में इन प्रतिबंधों को हटाया भी जा सकता है.
बातचीत से निकल सकता है टैरिफ हटाने का रास्ता
स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह टैरिफ लागू जरूर है, लेकिन अमेरिका इसे स्थायी व्यवस्था नहीं मानता. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का एक रास्ता बन सकता है. इसका सीधा मतलब है कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी और हालात अमेरिका के अनुकूल रहे, तो भारत को इस भारी-भरकम टैक्स से राहत मिल सकती है. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें तेल व्यापार और रूस पर लगे प्रतिबंधों के असर पर टिकी हैं और अमेरिका अपनी आर्थिक नीतियों की समीक्षा कर रहा है.
अगस्त 2025 से लागू है ऑयल पेनल्टी टैरिफ
मौजूदा टैरिफ ढांचे को समझें तो अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई सामानों पर कुल मिलाकर 50 प्रतिशत तक का भारी टैक्स लगा रखा है. इसमें करीब 25 प्रतिशत तो सामान्य टैरिफ है जो भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर लागू होता है, लेकिन इसके ऊपर अगस्त 2025 से एक अतिरिक्त 25 प्रतिशत ऑयल पेनल्टी टैरिफ भी जोड़ा गया था. अमेरिका का स्पष्ट मकसद इस पेनल्टी के जरिए भारत पर दबाव बनाना था ताकि वह रूस से तेल खरीदना बंद कर दे. अब अमेरिका का मानना है कि यह रणनीति काम कर गई है.
रूसी तेल पर सख्ती और भारतीय रिफाइनरियों का रुख
अमेरिका का यह दांव धरातल पर असर दिखाता नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी दबाव और टैरिफ के डर से रिलायंस जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनरियों ने जनवरी 2026 में रूस से तेल लेना रोक दिया है. उधर, अमेरिका, जी7 और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप को और सख्त कर दिया है, जिसे 1 फरवरी 2026 से घटाकर 44.10 डॉलर प्रति बैरल किया जाएगा. हालांकि, भारत ने हमेशा यह कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें राष्ट्रीय हित और किफायती दामों के आधार पर तय करेगा, लेकिन फिलहाल वह अमेरिका के 500 प्रतिशत टैरिफ वाले प्रस्तावित बिल पर भी सतर्कता से नजर बनाए हुए है.
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