फैटी लिवर की बीमारी आज के समय में तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है, जो शुरुआत में बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. खराब खानपान, बढ़ता मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली के चलते यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है. ऐसे में अब एक साधारण-सा दिखने वाला ड्रिंक—ब्लैक कॉफी—फैटी लिवर को लेकर चर्चा में आ गया है, जिसे लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही मात्रा और सही तरीके से इसका सेवन लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
कोलकाता की जानी-मानी डाइटिशियन और हेल्थ कोच निकिता बारडिया ने हाल ही में फैटी लिवर को लेकर ब्लैक कॉफी के फायदे साझा किए हैं. उनके अनुसार, ब्लैक कॉफी कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन यह लिवर को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभा सकती है. उन्होंने बताया कि फैटी लिवर की समस्या इसलिए ज्यादा खतरनाक मानी जाती है क्योंकि यह लंबे समय तक बिना दर्द और स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती है. जब तक मरीज को इसका पता चलता है, तब तक लिवर में फैट जम चुका होता है और सूजन भी बढ़ जाती है, जो आगे चलकर नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), फाइब्रोसिस और यहां तक कि सिरोसिस का कारण बन सकती है.
डाइटिशियन के मुताबिक, ब्लैक कॉफी में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स जैसे क्लोरोजेनिक एसिड और पॉलीफेनॉल्स लिवर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं. यही सूजन फैटी लिवर की बीमारी को गंभीर रूप देने में अहम भूमिका निभाती है. नियमित रूप से सादी ब्लैक कॉफी पीने से लिवर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है, जिससे लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है. कई स्टडीज में यह भी पाया गया है कि जो लोग नियमित रूप से कॉफी पीते हैं, उनके लिवर में फैट का स्तर तुलनात्मक रूप से कम देखा गया है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लैक कॉफी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह लिवर फाइब्रोसिस की रफ्तार को धीमा कर सकती है. फाइब्रोसिस वह स्थिति होती है जब लिवर में लंबे समय तक सूजन रहने के कारण वहां कठोर ऊतक बनने लगते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ रिसर्च में यह लाभ वजन घटे बिना भी देखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कॉफी का असर सीधे लिवर के मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है. इसके अलावा, नियमित ब्लैक कॉफी सेवन से ALT और AST जैसे लिवर एंजाइम्स के स्तर में भी सुधार देखा गया है, जिन्हें लिवर की सेहत का अहम संकेतक माना जाता है.
हालांकि एक्सपर्ट्स इस बात पर भी जोर देते हैं कि कॉफी का फायदा तभी मिलता है जब वह सादी ब्लैक कॉफी हो. इसमें चीनी, फ्लेवर्ड सिरप, क्रीमर या दूध मिलाने से इसका असर काफी हद तक खत्म हो सकता है. बाजार में मिलने वाली डेजर्ट कॉफी या मीठी कॉफी लिवर पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है, जिससे फायदे की जगह नुकसान होने की आशंका रहती है. डाइटिशियन का कहना है कि कुछ लोग कॉफी को मील रिप्लेसमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने लगते हैं, जो गलत आदत है और इससे मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
ब्लैक कॉफी की मात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिन में 2 से 3 कप ब्लैक कॉफी को सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है. कुछ स्टडीज में 4 कप तक के सेवन को भी लाभकारी बताया गया है, लेकिन इससे ज्यादा लेने पर नींद, हार्मोन और हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. कॉफी का सही समय मिड-मॉर्निंग या भोजन के बाद माना जाता है, जबकि देर रात कॉफी पीने से नींद खराब होने की संभावना रहती है, जो लिवर हेल्थ के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ब्लैक कॉफी किसी भी तरह से फैटी लिवर का इलाज नहीं है. अगर व्यक्ति की डाइट में ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्ब्स, जंक फूड और शराब शामिल है, नींद पूरी नहीं होती और शारीरिक गतिविधि न के बराबर है, तो केवल कॉफी पीने से कोई चमत्कार नहीं होगा. फैटी लिवर से बचाव और नियंत्रण के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितनी कि कोई हेल्दी ड्रिंक.
आज के समय में जब लोग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे डिटॉक्स ड्रिंक्स और चमत्कारी उपायों के पीछे भागते हैं, ऐसे में एक्सपर्ट्स की यह सलाह लोगों को यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की याद दिलाती है. ब्लैक कॉफी कोई महंगा या जटिल समाधान नहीं है, लेकिन सही जानकारी और समझ के साथ इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए तो यह लिवर को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी नए हेल्थ रूटीन को अपनाने से पहले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों को समझना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
फैटी लिवर जैसी साइलेंट बीमारी के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है. ऐसे में ब्लैक कॉफी को लेकर सामने आई यह जानकारी लोगों को अपनी दिनचर्या और खानपान पर दोबारा सोचने का मौका देती है. सही आदतों के साथ छोटा-सा बदलाव भी लंबे समय में लिवर की सेहत को बेहतर बना सकता है और गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

