सात इलाकों में हवा हुई जहरीली, रेड जोन में पहुंचे शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र

सात इलाकों में हवा हुई जहरीली, रेड जोन में पहुंचे शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र

प्रेषित समय :20:37:35 PM / Sat, Jan 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. पिछले 96 घंटों से जारी प्रदूषण का सिलसिला अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां शहर के सात प्रमुख रिहायशी और व्यापारिक क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी के उच्चतम स्तर को छू रही है। रात आठ बजे के डिजिटल विश्लेषण से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पूरे शहर का औसत एक्यूआई भले ही 154 हो, लेकिन मढ़ाताल, दमोह नाका और राइट टाउन जैसे इलाकों में यह आंकड़ा 180 के पार दर्ज किया गया है। हालांकि नगर प्रशासन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन इलाकों के लिए किसी विशेष 'इमरजेंसी एक्शन प्लान' की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन विभागीय सूत्रों के हवाले से यह बड़ी खबर मिल रही है कि इन 'हॉटस्पॉट्स' को चिन्हित कर वहां रात के समय धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों पर मौखिक रोक के निर्देश दिए गए हैं। यह पिछले चार दिनों में प्रदूषण का सबसे भयावह स्तर है, जिसने शहर के मानचित्र पर कई 'डेंजर जोन' बना दिए हैं।

इलाकेवार जांच-पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि मढ़ाताल और दमोह नाका में पीएम 2.5 का संकेंद्रण सबसे अधिक है, जिसका मुख्य कारण वाहनों का अत्यधिक दबाव और संकरी गलियों में हवा का रुकना है। वहीं, विजयनगर और अधारताल जैसे रिहायशी इलाकों में भी निर्माण गतिविधियों के कारण धूल के गुबार ने हवा को भारी बना दिया है। यद्यपि प्रदूषण बोर्ड की ओर से इन विशिष्ट इलाकों के लिए कोई आधिकारिक डेटा बुलेटिन जारी नहीं हुआ है, परंतु अपुष्ट सूत्रों का दावा है कि इन क्षेत्रों में हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि स्वस्थ व्यक्तियों को भी सीने में जकड़न महसूस हो रही है। विश्लेषणात्मक नजरिए से देखें तो जबलपुर का उत्तर-पूर्वी हिस्सा इस स्मॉग की चपेट में सबसे ज्यादा है क्योंकि वहां से आने वाली ठंडी हवाएं शहरी धुएं को बाहर नहीं निकलने दे रही हैं। यह स्थिति न केवल मौसमी है, बल्कि बुनियादी ढांचे के अनियोजित विकास का भी परिणाम नजर आती है।

इस डिजिटल नक्शे के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि ग्वारीघाट और तिलवारा जैसे नर्मदा तटीय क्षेत्रों में एक्यूआई तुलनात्मक रूप से बेहतर यानी 110-120 के बीच है, लेकिन शहरी केंद्र की स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। यद्यपि स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन हॉटस्पॉट्स के लिए किसी विशेष मेडिकल अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि स्थानीय अस्पतालों में सांस की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या में पिछले 48 घंटों में 15% की वृद्धि देखी गई है। प्रशासन की चुप्पी के बावजूद, शहर के जागरूक नागरिक अब सोशल मीडिया पर 'क्लीन एयर' कैंपेन चलाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि 21 जनवरी से शुरू हुआ यह प्रदूषण का ग्राफ लगातार ऊपर ही जा रहा है और फिलहाल मौसम विभाग की ओर से तेज हवाएं चलने की कोई संभावना नहीं जताई गई है।

वर्तमान स्थिति में पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग को भी उन क्षेत्रों में यातायात डायवर्जन पर विचार करना पड़ सकता है जहां वायु गुणवत्ता सबसे खराब है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक योजना अभी सामने नहीं आई है, परंतु अंदरूनी चर्चा है कि संवेदनशील इलाकों में पानी के छिड़काव के लिए नगर निगम की 'मिस्ट कैनन' मशीनों को सक्रिय किया जा सकता है। जबलपुर की जनता के लिए यह समय केवल सावधानी बरतने का नहीं, बल्कि प्रशासन से जवाब मांगने का भी है कि जब चार दिनों से स्थिति बिगड़ रही थी, तो पहले से एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए गए। कल सुबह की नई रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्या जबलपुर को भी बड़े महानगरों की तरह 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) की जरूरत है या नहीं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-