जबलपुर. कुण्डम थाना अंतर्गत बघराजी पुलिस चौकी एक बार फिर विवादों के घेरे में है जहां एक युवक ने पुलिसकर्मियों पर बर्बरतापूर्वक मारपीट करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे एसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ित सनी सोनी ने लिखित शिकायत सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई और बघराजी चौकी में तैनात एक उपनिरीक्षक (एसआई) सहित अन्य पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इस पूरे मामले में अब तक पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन पीड़ित की शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अनौपचारिक सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, पुलिस प्रशासन ने इस मामले की आंतरिक जांच के संकेत दिए हैं ताकि सत्यता का पता लगाया जा सके। यह घटनाक्रम घरेलू विवाद से शुरू हुआ था जिसने थाने की दहलीज पार करते ही एक नया और विवादित मोड़ ले लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना की जड़ें एक पारिवारिक कलह से जुड़ी हैं जहां सनी सोनी की पत्नी शिवानी ने घरेलू विवाद को लेकर बघराजी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित का आरोप है कि इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसे चौकी बुलाया और बिना किसी ठोस वैधानिक प्रक्रिया के करीब दो घंटे तक अवैध रूप से बैठाए रखा। शिकायत में सनी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस दौरान वहां मौजूद एसआई और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। हालांकि, पुलिस के अनौपचारिक सूत्रों का कहना है कि पुलिस केवल दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने और विवाद शांत करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन मारपीट के आरोपों ने पुलिस की 'काउंसलिंग' प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। अब यह जांच का विषय है कि क्या पुलिस ने अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया या फिर यह केवल दबाव बनाने का एक आरोप है।
एनालिटिकल नजरिए से देखें तो यह मामला पुलिस की छवि और कार्यशैली पर कई सवालिया निशान लगाता है। यदि पीड़ित के आरोपों में सच्चाई है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला बनता है, विशेषकर तब जब पुलिस को पारिवारिक विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए न कि दंडात्मक। एसपी कार्यालय में दी गई शिकायत में सनी ने अपनी चोटों और मानसिक प्रताड़ना का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी ओर, आधिकारिक तौर पर पुलिस अब भी वेट एंड वॉच की स्थिति में है और संबंधित चौकी प्रभारी से इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की जा सकती है। डिजिटल युग में जहां हर गतिविधि पर नजर होती है, वहां थाने के भीतर हुए इस कथित घटनाक्रम के साक्ष्य जुटाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान ही इस गुत्थी को सुलझा सकते हैं।
फिलहाल, इस मामले में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या एफआईआर की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पीड़ित का एसपी दरबार तक पहुंचना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर उसे न्याय की उम्मीद कम थी। जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस अक्सर विभागीय जांच के बाद ही कोई बड़ा कदम उठाती है। बघराजी चौकी के उन पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है जो उस समय ड्यूटी पर मौजूद थे। जब तक इस मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि दोषी कौन है, लेकिन इस विवाद ने कुण्डम क्षेत्र में पुलिस और जनता के बीच के विश्वास को निश्चित रूप से प्रभावित किया है। शहर के सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर नजर बना रखी है और निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई जा रही है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

