जबलपुर. गणतंत्र दिवस की दहलीज पर खड़े देश की सुरक्षा को लेकर जहां एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं वहीं मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आ रही है जिसने सुरक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।केंद्र सरकार के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक निर्णायक और गोपनीय अभियान छेड़ दिया है जिसके तहत जबलपुर में तीन संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को चिन्हित कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पूरी कार्रवाई इतनी गुप्त रखी गई कि स्थानीय स्तर पर भी इसकी भनक तब लगी, जब पुलिस की टीमें संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देने पहुंचीं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश के 26 जिलों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस अभियान में अब तक प्रदेश भर में 3,278 संदिग्धों को चिन्हित किया गया है। बताया गया कि गणतंत्र दिवस की सुरक्षा के मद्देनजर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तर्ज पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से खुफिया विभाग को इनपुट मिल रहे थे कि शहर के कुछ घनी आबादी वाले इलाकों और बाहरी बस्तियों में ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके पास पहचान के पुख्ता दस्तावेज नहीं हैं या जिन्होंने फर्जी तरीके से स्थानीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया और संदिग्धों के दस्तावेजों का मिलान उनके मूल निवास स्थान के रिकॉर्ड से कराया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि तीन व्यक्ति अपनी पहचान के संबंध में कोई भी संतोषजनक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए और प्रारंभिक पूछताछ में उनके तार पड़ोसी देश बांग्लादेश से जुड़े होने की पुष्टि हुई।
इस पूरी कार्रवाई का केंद्र बिंदु केंद्र सरकार द्वारा जारी वह गाइडलाइन है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने इसे एक प्रदेशव्यापी अभियान का रूप दिया है जिसमें जबलपुर एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। जबलपुर पुलिस की इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि गणतंत्र दिवस के मद्देनजर शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज करना घातक साबित हो सकता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन संदिग्धों को चिन्हित करने के बाद अब कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से सीमा पार भेजा जा सके या संबंधित दूतावासों के माध्यम से उनकी वापसी सुनिश्चित की जा सके। शहर के नागरिकों के बीच इस खबर के आने के बाद एक ओर जहां सुरक्षा को लेकर संतोष देखा जा रहा है वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर ये लोग इतने समय तक स्थानीय प्रशासन की नजरों से बचकर शहर में कैसे रह रहे थे। पुलिस प्रशासन अब उन मकान मालिकों और बिचौलियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है जिन्होंने बिना सत्यापन के इन संदिग्धों को शरण दी या उनके फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की।
जबलपुर के गोरखपुर, हनुमानताल और ओमती जैसे इलाकों में पुलिस ने अपनी गश्त तेज कर दी है और होटलों से लेकर लॉज तक की तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं क्योंकि डेटाबेस के आधार पर अभी कई और संदिग्ध रडार पर हैं। प्रदेश के अन्य जिलों जैसे इंदौर और भोपाल में भी इसी तरह की धरपकड़ की खबरें हैं लेकिन जबलपुर में हुई यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय का एक सटीक उदाहरण पेश करती है। इस अभियान के तहत पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन संदिग्धों का उपयोग किसी असामाजिक गतिविधि या नेटवर्क के विस्तार के लिए तो नहीं किया जा रहा था। तकनीकी रूप से भी इन संदिग्धों के मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स की गहन जांच की जा रही है ताकि उनके संपर्कों का कच्चा चिट्ठा खोला जा सके।
पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि चिन्हित किए गए तीनों संदिग्ध लंबे समय से शहर के अलग-अलग हिस्सों में छिपकर रह रहे थे और छोटे-मोटे कार्यों की आड़ में अपनी पहचान छुपाए हुए थे। उनके पास से बरामद कुछ दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर किया गया है। वर्तमान में इन तीनों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके डिपोर्टेशन की फाइल तैयार की जा रही है। जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने आसपास रहने वाले किसी भी अज्ञात या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि शहर की शांति व्यवस्था बनी रहे। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश अब घुसपैठियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगा और केंद्र के सख्त रुख का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुरक्षा के इस महाअभियान ने जबलपुर के प्रशासनिक अमले को भी सतर्क कर दिया है और अब हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रखी जा रही है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

