पोर्ट ब्लेयर. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को अक्सर भारत के आखिरी अछूते उष्णकटिबंधीय स्वर्ग के रूप में देखा जाता है, जो अपने नीले पानी और एकांत तटों के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस खूबसूरत छवि के पीछे की एक कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने ला दिया है। कंटेंट क्रिएटर विष्णु द्वारा लिटिल अंडमान द्वीप के एक सुदूर तट पर शूट किए गए इस वीडियो ने समुद्री प्रदूषण और इसके सीमा पार प्रभावों पर एक नई वैश्विक बहस छेड़ दी है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक प्राचीन और शांत दिखने वाले समुद्र तट पर प्लास्टिक कचरे का ढेर लगा हुआ है, जिसने इस पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। विष्णु और उनके साथियों ने जब इस कचरे की पड़ताल की, तो जो तथ्य सामने आए वे न केवल चौंकाने वाले थे बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी सामूहिक विफलता को भी दर्शाते थे।
तट पर बिखरी हुई बोतलों, कंटेनरों और पैकेजिंग की जांच करने पर पाया गया कि इस कचरे का एक बड़ा हिस्सा भारत का नहीं, बल्कि पड़ोसी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, म्यांमार और मलेशिया का है। इन सामानों पर लगे मैन्युफैक्चरिंग लेबल और ब्रांड्स इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि ये कचरा हजारों किलोमीटर दूर से बहकर यहाँ पहुंचा है। विष्णु ने वीडियो में दिखाया कि कैसे समुद्री धाराएं (Ocean Currents) एक देश के कचरे को दूसरे देश की सीमाओं तक ले जाती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि भारत की अपनी कचरा प्रबंधन चुनौतियां हैं, लेकिन यह समस्या किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की है। अक्सर स्वच्छता के पैमानों पर भारत की आलोचना करने वाले पड़ोसी देशों का प्लास्टिक कचरा भारतीय तटों को गंदा कर रहा है, जो वैश्विक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और इसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। 'देयर इज नो प्लैनेट बी' के संदेश के साथ प्रसारित इस वीडियो पर कमेंट करते हुए यूजर्स ने इसे मानवता की सामूहिक विफलता करार दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर की लहरें दक्षिण-पूर्वी एशिया के तटीय क्षेत्रों से फेंके गए प्लास्टिक को आसानी से अंडमान के द्वीपों की ओर धकेल देती हैं। यह कचरा न केवल दृश्य प्रदूषण फैलाता है, बल्कि समुद्री जीवन के लिए भी घातक है क्योंकि प्लास्टिक दशकों तक सड़ता नहीं है और अंततः हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक्स में बदलकर खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बन जाता है। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि अगर हम अपनी नदियों और समुद्रों में प्लास्टिक फेंकना बंद नहीं करेंगे, तो दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं बचेगा।
वीडियो देखने के लिए क्लिक करें : https://twitter.com/i/status/2015348384123789610
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

