AajKaDin: 28 जनवरी 2026, जो श्रद्धालु एकादशी व्रत रखते हैं, उन्हें दशमी को एक बार भोजन करना चाहिए!

AajKaDin: 28 जनवरी 2026, जो श्रद्धालु एकादशी व्रत रखते हैं, उन्हें दशमी को एक बार भोजन करना चाहिए!

प्रेषित समय :21:26:29 PM / Tue, Jan 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* जया एकादशी - 29 जनवरी 2026
* पारण का समय - 07:18 एएम से 09:30 एएम, 29 जनवरी 2026
* पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 11:09 एएम
* एकादशी तिथि प्रारम्भ - 28 जनवरी 2026 को 04:35 पीएम बजे
* एकादशी तिथि समाप्त - 29 जनवरी 2026 को 01:55 पीएम बजे

अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..
* जीवन में कामयाबी के लिए नियमित रूप से विष्णुदेव की पूजा करें.
* धर्मग्रंथों में... जीवन में सुख के लिए एकादशी व्रत-पूजा को उत्तम मार्ग बताया है.
* जो श्रद्धालु यह व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें दशमी को एक बार भोजन करना चाहिए.
* एकादशी के दिन पवित्र स्नानादि के पश्चात गंगा जल, तुलसी दल, तिल, फूल, पंचामृत आदि से भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए.
* इस व्रत में व्रत रखने वाले श्रद्धालु को यथासंभव बिना जल के रहना चाहिए.
* अगर व्रती श्रद्धालु चाहें तो संध्याकाल में दीपदान के पश्चात फलाहार ग्रहण कर सकते हैं.
* क्योंकि सुख के लिए यह व्रत है इसलिए यथासंभव पति-पत्नी, दोनों को व्रत रखना चाहिए.  
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 28 जनवरी 2026
* रोहिणी व्रत, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग
* उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्र के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया.
ब्रह्म मुहूर्त- 05:35 ए एम से 06:27 ए एम, प्रातः सन्ध्या- 06:01 ए एम से 07:19 ए एम, विजय मुहूर्त- 02:38 पी एम से 03:22 पी एम, गोधूलि मुहूर्त- 06:15 पी एम से 06:41 पी एम, सायाह्न सन्ध्या- 06:18 पी एम से 07:36 पी एम, अमृत काल- 04:35 ए एम (29 जनवरी 2026) से 06:03 ए एम (29 जनवरी 2026) निशिता मुहूर्त- 12:22 ए एम (29 जनवरी 2026) से 01:14 ए एम (29 जनवरी 2026)
* दिन का चौघड़िया
लाभ - 07:19 से 08:41
अमृत - 08:41 से 10:04
काल - 10:04 से 11:26
शुभ - 11:26 से 12:48
रोग - 12:48 से 02:11
उद्वेग - 02:11 से 03:33
चर - 03:33 से 04:55
लाभ - 04:55 से 06:18
* रात्रि का चौघड़िया
उद्वेग - 06:18 से 07:55
शुभ - 07:55 से 09:33
अमृत - 09:33 से 11:10
चर - 11:10 से 12:48
रोग - 12:48 से 02:26
काल - 02:26 से 04:03
लाभ - 04:03 से 05:41
उद्वेग - 05:41 से 07:18
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-