टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली की वापसी की सुगबुगाहट, क्या दांव पर लगने जा रही है उनकी विरासत

टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली की वापसी की सुगबुगाहट, क्या दांव पर लगने जा रही है उनकी विरासत

प्रेषित समय :21:53:59 PM / Tue, Jan 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर विराट कोहली के नाम ने बहस को जन्म दे दिया है. सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं, वनडे क्रिकेट में उनके शानदार फॉर्म और कुछ पुरानी यादों को ताजा करने वाले वीडियो क्लिप्स के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या विराट कोहली 2026 में टेस्ट क्रिकेट में वापसी कर सकते हैं. हालांकि यह विचार रोमांचक लग सकता है, लेकिन क्रिकेट की सबसे कठोर और निष्पक्ष परीक्षा माने जाने वाले टेस्ट फॉर्मेट में यह कदम उनकी पहले से स्थापित विरासत के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है.

विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट से उस समय विदा हुए थे, जब उनका अध्याय अधूरा नहीं था. 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन, 30 शतक और 31 अर्धशतक, ये आंकड़े उन्हें भारत के महानतम टेस्ट बल्लेबाजों की सूची में मजबूती से स्थापित करते हैं. कप्तान के रूप में उनका रिकॉर्ड और भी प्रभावशाली रहा है. 68 टेस्ट मैचों में 40 जीत के साथ वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान रहे हैं और विश्व क्रिकेट में भी केवल ग्रीम स्मिथ, रिकी पोंटिंग और स्टीव वॉ के बाद चौथे स्थान पर आते हैं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली की कहानी पूरी हो चुकी है.

यही वजह है कि 2026 में संभावित वापसी की चर्चा कई सवाल खड़े करती है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस वापसी से हासिल क्या होगा. कोहली की विरासत पहले ही मजबूत और सुरक्षित है. उनके पास टेस्ट क्रिकेट में साबित करने के लिए कुछ बचा नहीं है. ऐसे में एक बार फिर सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना केवल उनके पुराने प्रदर्शन को नए सिरे से जांच के दायरे में लाने जैसा होगा.

क्रिकेट इतिहास गवाह है कि टेस्ट क्रिकेट भावनाओं या कहानियों पर नहीं चलता. यह फॉर्मेट तकनीक, धैर्य, निरंतरता और मानसिक मजबूती की सख्त परीक्षा लेता है. किसी भी बल्लेबाज के करियर के अंतिम पड़ाव पर यह परीक्षा और भी कठिन हो जाती है. विराट कोहली जैसे खिलाड़ी के लिए हर पारी, हर श्रृंखला और हर असफलता को बेहद बारीकी से परखा जाएगा. एक-दो कम स्कोर भी तुरंत उम्र, गिरती फॉर्म और गलत फैसले की बहस को जन्म दे सकते हैं.

विराट कोहली की टेस्ट बल्लेबाजी में गिरावट अचानक नहीं आई थी. 2011 से 2019 के बीच उनका औसत लगभग 55 के आसपास रहा, जो किसी भी महान बल्लेबाज की पहचान होता है. लेकिन 2020 से 2025 के बीच यह औसत गिरकर लगभग 31 तक आ गया. यह सिर्फ एक खराब दौर नहीं था, बल्कि लंबे समय तक चली तकनीकी और मानसिक जद्दोजहद का संकेत था. इसी वजह से उनके टेस्ट क्रिकेट से संन्यास को सही समय पर लिया गया फैसला माना गया था, न कि किसी एक सीरीज या एक मैच का नतीजा.

अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि अगर विराट कोहली वनडे क्रिकेट में रन बना रहे हैं, तो वह टेस्ट में भी वापसी कर सकते हैं. लेकिन वनडे और टेस्ट क्रिकेट की मांगें बिल्कुल अलग हैं. वनडे फॉर्मेट में कोहली की सबसे बड़ी ताकतें—रिदम, स्ट्राइक रोटेशन और मैच की समझ—अब भी उतनी ही प्रभावी हैं. इसके उलट टेस्ट क्रिकेट में घंटों गेंद छोड़ने, लगातार सटीक लाइन-लेंथ का सामना करने और धैर्य की परीक्षा देने की जरूरत होती है. यहां गेंदबाजों को रणनीति बनाने का समय मिलता है और बल्लेबाज की छोटी-सी कमजोरी भी बार-बार उजागर होती है.

एक और बड़ा खतरा यह भी है कि टेस्ट क्रिकेट में वापसी का दबाव उनके वनडे खेल पर असर डाल सकता है. 2027 के वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए विराट कोहली इस समय जिस फॉर्मेट में सबसे अधिक सहज और प्रभावी दिख रहे हैं, वह वनडे ही है. टेस्ट क्रिकेट में वापसी के लिए तकनीकी बदलाव और मानसिक तैयारी कहीं न कहीं उनके मौजूदा संतुलन को बिगाड़ सकती है.

भारतीय क्रिकेट में टेस्ट संन्यास को आमतौर पर अंतिम माना जाता है. एक बार जब खिलाड़ी यह घोषणा कर देता है कि वह टेस्ट क्रिकेट से हट रहा है, तो टीम प्रबंधन और चयनकर्ता आगे की योजना बनाते हैं. वापसी के उदाहरण बेहद कम हैं और वे भी अल्पकालिक रहे हैं. विराट कोहली जैसे कद के खिलाड़ी के लिए वापसी केवल एक क्रिकेटिंग फैसला नहीं होगी, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर संन्यास की अवधारणा पर सवाल खड़े कर देगी.

सबसे अच्छा परिदृश्य यही हो सकता है कि विराट वापसी करें, कुछ अच्छी पारियां खेलें और फिर विदा ले लें. लेकिन इससे उनकी विरासत में कोई बड़ा इजाफा नहीं होगा. इसके उलट, अगर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो उनकी टेस्ट क्रिकेट की कहानी को गिरावट के दौर के साथ याद किया जाने लगेगा. यह जोखिम उस विरासत के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा है, जिसे उन्होंने पहले ही सुरक्षित कर लिया है.

क्रिकेट इतिहास में कई बड़े नामों की वापसी ने यह दिखाया है कि दूसरी पारी अक्सर उतनी सुंदर नहीं होती, जितनी कल्पना की जाती है. वापसी अधिकतर संघर्ष, बहस और अनिश्चितता से भरी रहती है. विराट कोहली के मामले में भी यही सच सामने आता है. उनके लिए सबसे सशक्त और सम्मानजनक अंत यही है कि टेस्ट क्रिकेट में उनका अध्याय वहीं बंद रहे, जहां वह पहले ही एक पूर्ण और गौरवशाली कहानी बन चुका है.

विराट कोहली का योगदान, उनका जुनून और उनका रिकॉर्ड भारतीय टेस्ट क्रिकेट में हमेशा याद किया जाएगा. ऐसे में शायद सबसे समझदारी भरा फैसला यही होगा कि वह अपनी सफेद जर्सी की विरासत को एक संपूर्ण चित्र की तरह सुरक्षित रखें, न कि उसे दोबारा खोलकर नई बहसों और जोखिमों के हवाले करें.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-