नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने दुनिया भर की कंपनियों को डेटा सुरक्षा को लेकर कहीं अधिक सतर्क बना दिया है। इसी कड़ी में सामने आई सिस्को की एक ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई को अपनाने की होड़ में 97 फीसदी कंपनियों ने अपने प्राइवेसी प्रोग्राम का विस्तार किया है, जबकि करीब 96 फीसदी संगठन आने वाले समय में डेटा प्रोटेक्शन पर और ज्यादा निवेश करने की तैयारी में हैं। यह साफ संकेत है कि एआई के युग में डेटा सुरक्षा अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।
सिस्को द्वारा तैयार इस अध्ययन में दुनिया के 12 देशों से 5,200 से अधिक आईटी, टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स को शामिल किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि एआई ही वह प्रमुख ताकत है, जिसने कंपनियों को अपनी प्राइवेसी और डेटा गवर्नेंस नीतियों को नए सिरे से मजबूत करने के लिए मजबूर किया है। मशीन लर्निंग, जेनरेटिव एआई और ऑटोमेशन जैसे टूल्स के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा की मात्रा और उसकी संवेदनशीलता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत के संदर्भ में रिपोर्ट और भी अहम हो जाती है। सर्वे में शामिल लगभग सभी भारतीय कंपनियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने एआई सिस्टम की जटिलता को देखते हुए अपने प्राइवेसी प्रोग्राम को विस्तार दिया है। भारतीय कंपनियों का मानना है कि मजबूत डेटा सुरक्षा ढांचा न केवल कानूनी जोखिमों को कम करता है, बल्कि बिजनेस ग्रोथ में भी सीधा योगदान देता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वे की गई हर कंपनी ने अपने प्राइवेसी प्रयासों से कम से कम एक व्यावसायिक लाभ हासिल होने की बात कही है।
इन लाभों में तेज इनोवेशन, बेहतर बिजनेस एजिलिटी और ग्राहकों का बढ़ता भरोसा प्रमुख रूप से शामिल हैं। कंपनियों का कहना है कि जब ग्राहक यह जानते हैं कि उनका डेटा सुरक्षित हाथों में है और उसका इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, तो वे एआई आधारित सेवाओं को अपनाने में ज्यादा सहज महसूस करते हैं। इसी कारण से डेटा ट्रांसपेरेंसी को अब ब्रांड वैल्यू का अहम हिस्सा माना जाने लगा है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि वैश्विक स्तर पर प्राइवेसी से जुड़े खर्च में तेज उछाल आया है। कई कंपनियां अब हर साल मिलियन डॉलर तक डेटा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर खर्च कर रही हैं। साइबर अटैक, डेटा लीक और रेगुलेटरी जुर्मानों के बढ़ते खतरे के बीच यह निवेश कंपनियों को दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता प्रदान कर रहा है।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है। प्राइवेसी प्रोग्राम के विस्तार के बावजूद, डेटा गवर्नेंस अभी भी कई संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 70 फीसदी कंपनियों ने माना कि उन्हें एआई सिस्टम के लिए जरूरी उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रासंगिक डेटा को मैनेज करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सही डेटा तक समय पर पहुंच और उसका प्रभावी उपयोग अब भी कई संगठनों के लिए आसान नहीं हो पाया है।
कई कंपनियों ने एआई गवर्नेंस के लिए अलग से समितियां और ढांचे जरूर बनाए हैं, लेकिन बहुत कम संगठन ऐसे हैं जो इन्हें पूरी तरह परिपक्व मानते हैं। इसका सीधा असर एआई के जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डेटा गवर्नेंस स्पष्ट और मजबूत नहीं होगी, तब तक एआई से जुड़े फैसलों की व्याख्या करना और उन पर भरोसा कायम रखना मुश्किल रहेगा।
सिस्को के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि एआई केवल व्यक्तिगत डेटा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर तरह के डेटा को प्रभावित करता है। ऐसे में संगठनों को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, जिसमें सभी प्रकार के डेटा की पहचान, संरचना और प्रबंधन स्पष्ट रूप से किया जाए। इससे न केवल एआई के फैसलों को समझना आसान होगा, बल्कि रेगुलेटरी अनुपालन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
रिपोर्ट में सीमा-पार डेटा ट्रांसफर को लेकर बढ़ती चिंताओं का भी जिक्र किया गया है। भारत में डेटा लोकलाइजेशन की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन कई कंपनियों का मानना है कि इससे लागत और जटिलता दोनों बढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों के लिए अलग-अलग देशों के डेटा नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसके चलते कई संगठन वैश्विक स्तर पर समन्वित और एकरूप डेटा ट्रांसफर नियमों का समर्थन कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित और निर्बाध सेवाएं दी जा सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के युग में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह अब बोर्डरूम का मुद्दा बन चुका है, जहां बिजनेस रणनीति और टेक्नोलॉजी फैसले एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। मजबूत प्राइवेसी ढांचा कंपनियों को न केवल जोखिम से बचाता है, बल्कि उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी देता है।
कुल मिलाकर, सिस्को की यह रिपोर्ट साफ तौर पर इशारा करती है कि एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ डेटा सुरक्षा पर निवेश आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा। जो कंपनियां समय रहते प्राइवेसी और डेटा गवर्नेंस को प्राथमिकता देंगी, वही एआई आधारित भविष्य में टिकाऊ सफलता हासिल कर पाएंगी। वहीं जो संगठन इस मोर्चे पर पीछे रहेंगे, उनके लिए कानूनी, आर्थिक और भरोसे से जुड़े जोखिम और गहराते जाएंगे।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

