मोदी सरकार के यूजीसी के नए नियमों ने बीजेपी की हालत तरबूज-छुरी वाली कर दी है?

मोदी सरकार के यूजीसी के नए नियमों ने बीजेपी की हालत तरबूज-छुरी वाली कर दी है?

प्रेषित समय :23:16:05 PM / Wed, Jan 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

प्रदीप द्विवेदी 
यूजीसी के नए नियमों पर सियासी हंगामे के बीच प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. 
हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सही तथ्य छात्रों के सामने रखे जाएंगे, लेकिन सियासी रायता फैल चुका है और इसके नतीजे में बीजेपी की हालत तरबूज-छुरी वाली हो गई है.
अब यह नियम बने रहे तो सवर्ण नाराज होंगे और बीजेपी का नुकसान होगा और अगर यह हटा दिए जाते हैं, तो ओबीसी नाराज होंगे और बीजेपी का नुकसान होगा, मतलब.... तरबूज छुरी पर गिरे या छुरी तरबूज पर, कटना तरबूज को ही है.
इस वक्त तो यह मामला देशभर में तेजी से फैल रहा है और कई संगठन यूजीसी से इस नए नियम को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
सामान्य वर्ग के छात्रों का  आक्रोश है कि यूजीसी के ये नियम 'रिवर्स बायस' मतलब... उल्टा भेदभाव पैदा कर सकते हैं, क्योंकि नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों का अभाव है, जिससे निर्दोष छात्रों, शिक्षकों आदि को बिना साक्ष्य के आसानी से निशाना बनाया जा सकता है. इन नियमों के बाद सवर्ण तो परेशान हैं ही, अप्रत्यक्ष रूप से एससी-एसटी का सुरक्षाचक्र भी कमजोर हुआ है, क्योंकि, यह केवल किसी सवर्ण के दूर्व्यवहार से ही बचा पाएगा.
इससे ओबीसी को भी कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं होना है. अलबत्ता, वह अलग-थलग जरूर पड़ जाएंगे.
विश्वविद्यालयों में 'इक्विटी स्क्वॉड' और निगरानी तंत्र को 'सर्विलांस कल्चर' के रूप में भी देखा जा रहा है, जो शैक्षणिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है, यही नहीं, ये नियम अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इसमें सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व नहीं है.
इन नियमों के बाद बीजेपी में भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं, लिहाजा यह बीजेपी के लिए अच्छे सियासी लक्षण नहीं हैं.
खासकर, बीजेपी के बड़े
सवर्ण नेताओं के लिए सवालिया निशान लग गया है.
बहरहाल, तीर निकल चुका है और यह बीजेपी काे ही  सियासी घाव देगा.
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन को रोकना आने वाले दिनों में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-