पटना. बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी गयाजी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की बिहार क्षेत्र की तीन दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक का सफल आयोजन किया गया. इस महत्वपूर्ण सांगठनिक जमावड़े में दक्षिण बिहार, उत्तर बिहार और झारखंड प्रांत के लगभग 80 प्रमुख पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. अनिल मिश्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रैमासिक बैठक का उद्देश्य न केवल संगठन की मजबूती को परखना था, बल्कि भविष्य के शैक्षणिक और सामाजिक आंदोलनों की एक ठोस रूपरेखा तैयार करना भी रहा. बैठक के दौरान छात्र शक्ति को राष्ट्र शक्ति में बदलने के संकल्प के साथ तीनों प्रांतों के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया.
बैठक के शुरुआती सत्र पूरी तरह से सांगठनिक समीक्षा पर केंद्रित रहे. पिछले सत्र के दौरान चलाए गए अभियानों की बारीकी से जांच की गई और आगामी वर्ष के लिए एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की गई. अभाविप द्वारा वर्षभर आयोजित होने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों, नए छात्रों के जुड़ाव और संगठन के विस्तार की रणनीतियों पर घंटों मंथन चला. इस दौरान पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन की पहुंच राज्य के हर अंतिम छोर तक होनी चाहिए ताकि कोई भी छात्र अपनी समस्याओं के लिए अकेला महसूस न करे. द्वितीय और तृतीय सत्र में शिक्षा जगत की वर्तमान चुनौतियों और ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें छात्रों के अधिकारों की रक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी आंदोलन छेड़ने की बात कही गई.
बैठक की गरिमा क्षेत्रीय संगठन मंत्री यज्ञवल शुक्ला की उपस्थिति से और बढ़ गई. अपने संबोधन में उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन के मूल सिद्धांतों—अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना की याद दिलाई. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभाविप केवल एक छात्र संगठन नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक पाठशाला है. शुक्ला ने आह्वान किया कि कार्यकर्ता शैक्षणिक परिसरों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सदैव तत्पर रहें. उन्होंने कहा कि छात्र हितों के लिए परिषद का संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षा प्रणाली में वांछित सुधार और छात्र कल्याण सुनिश्चित नहीं हो जाता.
समापन सत्र के दौरान, गयाजी की इस पावन धरती से सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में संकल्प लिया कि वे संगठन की राष्ट्रवादी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएंगे. बैठक का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि आने वाले समय में अभाविप बिहार और झारखंड में छात्र राजनीति के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय एकता के विषयों पर और अधिक सक्रिय होगी. संगठन के जमीनी विस्तार और छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी कार्यनीति तैयार की गई है, जो आने वाले दिनों में शैक्षणिक परिसरों में दिखाई देगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

