भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन का न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में खराब प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है, खासकर तब जब भारत को इसी साल घरेलू मैदान पर टी20 विश्व कप का खिताब बचाना है। लगातार मिल रहे मौकों के बावजूद संजू सैमसन अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इस बीच पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने संजू के खराब फॉर्म के पीछे मानसिक दबाव को बड़ी वजह बताया है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में संजू सैमसन चार पारियों में सिर्फ 40 रन ही बना सके हैं। उन्होंने क्रमशः 10, 6, 0 और 24 रन की पारियां खेलीं। शुरुआती तीन मुकाबलों में वह तेज गेंदबाजों के खिलाफ जल्दी आउट हुए, जबकि एक मैच में सेट होने के बाद स्पिनर का शिकार बन गए। यह पैटर्न भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि संजू को लंबे समय से सीमित ओवरों में एक स्थायी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
रविचंद्रन अश्विन ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि संजू इस समय काफी मानसिक दबाव में नजर आ रहे हैं। उनके मुताबिक, जब किसी खिलाड़ी का दिमाग बहुत सारे विचारों से भरा होता है, तो गेंद की लाइन और लेंथ को सही तरीके से पढ़ना मुश्किल हो जाता है। अश्विन का मानना है कि संजू का टैलेंट किसी से छिपा नहीं है, लेकिन दबाव के कारण वह अपने स्वाभाविक खेल से भटकते दिख रहे हैं।
अश्विन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खासकर टी20 जैसे फॉर्मेट में मानसिक स्पष्टता बेहद जरूरी होती है। बल्लेबाज को यह तय करना होता है कि किस गेंद पर अटैक करना है और किसे छोड़ना है। जब खिलाड़ी अपने स्थान, चयन और प्रदर्शन को लेकर लगातार सोचता रहता है, तो फैसलों में असमंजस आ जाता है। यही असमंजस संजू के खेल में साफ दिखाई दे रहा है।
संजू सैमसन लंबे समय से भारतीय टीम के इर्द-गिर्द बने हुए हैं, लेकिन वह अब तक खुद को एक स्थायी सदस्य के रूप में स्थापित नहीं कर पाए हैं। कभी शानदार पारी खेलकर वह उम्मीदें जगा देते हैं, तो कभी लगातार असफलताएं उन पर सवाल खड़े कर देती हैं। इस सीरीज में भी एक बार फिर वही कहानी दोहराई गई है। शुरुआती ओवरों में गैर-जरूरी शॉट खेलकर विकेट गंवाना और सेट होने के बाद लय को बरकरार न रख पाना उनकी सबसे बड़ी समस्या रही है।
टीम इंडिया के नजरिये से यह समय बेहद अहम है। घरेलू परिस्थितियों में होने वाले टी20 विश्व कप से पहले टीम प्रबंधन संयोजन को अंतिम रूप देना चाहेगा। ऐसे में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऋषभ पंत की वापसी के बाद मुकाबला और कड़ा हो गया है, और ईशान किशन जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में संजू पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव स्वाभाविक है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि संजू को इस दौर में तकनीकी सुधार से ज्यादा मानसिक मजबूती पर काम करने की जरूरत है। उन्हें खुद पर भरोसा बनाए रखना होगा और चयन को लेकर चल रही चर्चाओं से खुद को अलग रखना होगा। अश्विन की टिप्पणी भी इसी ओर इशारा करती है कि समस्या स्किल की नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता की है।
अब देखना होगा कि संजू सैमसन आने वाले मुकाबलों में इस दबाव से कैसे उबरते हैं। यदि वह अपने दिमाग को शांत रखकर स्वाभाविक खेल खेल पाते हैं, तो उनकी क्षमता किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की है। लेकिन अगर यही असमंजस जारी रहा, तो टीम इंडिया के लिए टी20 विश्व कप से पहले विकेटकीपर-बल्लेबाज के विकल्पों पर गंभीर विचार करना पड़ सकता है।
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