अनिल मिश्र/रांची
केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी), कांके, रांची में पिछले लगभग 25 वर्षों से कार्यरत 156 सुरक्षा कर्मियों को हटाने के निर्णय ने न केवल संस्थान परिसर बल्कि पूरे राज्य में गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है. जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र तिवारी ने इस फैसले को अमानवीय, अन्यायपूर्ण और संवेदनहीन बताते हुए इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है, जिनका जीवन वर्षों से इसी रोजगार पर निर्भर रहा है.
धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि हाल ही में उन्होंने इन सुरक्षा कर्मियों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा को सुना, जिसमें यह सामने आया कि इस समूह में लगभग 30 महिलाएं, 16 विधवाएं और अनेक ऐसे परिवार शामिल हैं, जिनके लिए यही एकमात्र कमाई का साधन है. कर्मियों के अनुसार, 27 जनवरी को उन्हें अचानक यह सूचना दी गई कि वे केवल 31 जनवरी तक ही ड्यूटी करेंगे और 1 फरवरी से उनकी जगह होमगार्ड के जवानों को तैनात कर दिया जाएगा. बिना किसी पूर्व सूचना, वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास योजना के ऐसा निर्णय लेना न केवल प्रशासनिक लापरवाही दर्शाता है, बल्कि मानवीय मूल्यों के भी खिलाफ है.
तिवारी ने कहा कि ये सुरक्षा कर्मी केवल गेट पर खड़े होकर पहरा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्षों से महिला एवं पुरुष मरीजों की देखरेख, संस्थान परिसर की निगरानी, अनुशासन बनाए रखने, ओपीडी सेवाओं में सहयोग, पियून जैसे कार्यों और कई अन्य जिम्मेदारियों को भी ईमानदारी से निभाते आ रहे हैं. इसके बावजूद इन्हें 26 कार्यदिवस के आधार पर मात्र 893 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है, जिसमें से 60 रुपये पीएफ के रूप में काट लिए जाते हैं. इतनी कम मजदूरी के बावजूद इन कर्मियों ने कभी सेवा में कमी नहीं आने दी.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने किसी भी तरह का विरोध न हो, इसके लिए कुछ मुखर सुरक्षा कर्मियों पर दबाव बनाने की कोशिश की. कर्मियों को यह जानकारी मिली है कि जिन 15 लोगों ने आवाज उठाई थी, उनके खिलाफ संस्थान प्रशासन की ओर से एसडीओ के यहां एफआईआर दर्ज कराई गई है. तिवारी ने सवाल उठाया कि यह कैसा न्याय है, जिसमें कर्मचारियों के मुंह बंद करने के लिए कानूनी दबाव का सहारा लिया जा रहा है ताकि पहले से तय निर्णय को बिना विरोध लागू किया जा सके.
इस पूरे मामले को और गंभीर बताते हुए तिवारी ने संस्थान में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्यरत कर्मियों को कई अनियमितताओं की जानकारी है और संभव है कि इन्हीं कारणों से उन्हें हटाकर नए लोगों को लाने की कोशिश की जा रही हो. अगस्त 2024 में एक निजी सुरक्षा एजेंसी द्वारा प्रत्येक कर्मी से 40 हजार रुपये तक की अवैध वसूली का मामला सामने आ चुका है, जिसका जब जोरदार विरोध हुआ तो राशि वापस कराई गई. यह घटना इस बात का संकेत है कि संस्थान में व्यवस्थागत गड़बड़ियां लंबे समय से चली आ रही हैं और शासन-प्रशासन को इसकी जानकारी भी है.
धर्मेंद्र तिवारी ने यह भी बताया कि संस्थान के निदेशक द्वारा कर्मियों को “एकोमोडेशन” देने का आश्वासन दिया गया है. ऐसे में यह व्यवस्था तत्काल 1 फरवरी से लागू की जानी चाहिए, ताकि किसी भी कर्मचारी का रोजगार न छीना जाए और उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर निदेशक ने यह आश्वासन दिया है कि किसी को नहीं निकाला जाएगा और सभी सेवा में बने रहेंगे, तो फिर जमीनी स्तर पर इसका पालन क्यों नहीं हो रहा है.
उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित विभागों से स्पष्ट मांग की कि वर्षों से कार्यरत सभी सुरक्षा कर्मियों को हटाने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए, उन्हें नियमित या स्थायी सेवा अथवा सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए, संस्थान में हुए भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और मरीजों की सेवा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न होने दिया जाए.
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान में कुछ डॉक्टरों के समूह द्वारा बाहरी दुकानदारों से पैसे लेने और छोटे कर्मचारियों को परेशान करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, जो पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती हैं. उन्होंने मांग की कि इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
जनता दल यूनाइटेड ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर प्रभावित सुरक्षा कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और यदि आवश्यक हुआ तो आंदोलनात्मक कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगी. साथ ही सीआईपी प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि जिन कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, उन्हें तत्काल रद्द कराया जाए, ताकि भय और दबाव का माहौल खत्म हो सके.
इस बीच तिवारी ने जानकारी दी कि केंद्रीय सुरक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को पूरे मामले से अवगत कराया गया है. मंत्री ने आश्वासन दिया है कि यह विषय उनके संज्ञान में है, इस पर कार्य हो रहा है और किसी भी सुरक्षाकर्मी को हटाया नहीं जाएगा. अब देखना यह है कि प्रशासनिक स्तर पर यह आश्वासन कब और किस रूप में जमीनी हकीकत बनता है, क्योंकि फिलहाल दर्जनों परिवार अनिश्चितता और चिंता के दौर से गुजर रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

