रविपुष्यामृत योग का विशेष प्रभाव आज 1 फरवरी 2026 रविवार को सूर्योदय से रात्रि 11:58 तक

रविपुष्यामृत योग का विशेष प्रभाव आज 1 फरवरी 2026 रविवार को सूर्योदय से रात्रि 11:58 तक

प्रेषित समय :22:49:24 PM / Sat, Jan 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

1 फरवरी 2026 रविवार का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्योदय से लेकर रात्रि 11:58 तक रविपुष्यामृत योग का प्रभाव रहेगा, जो अपने आप में अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक योग है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस योग के दौरान किए गए किसी भी धार्मिक, आध्यात्मिक और पुण्यकारी कर्म का प्रभाव अत्यधिक बढ़ जाता है। इस योग का संबंध विशेष रूप से पुष्य नक्षत्र से है, जो समृद्धि और संपत्ति देने वाला माना जाता है।

ज्योतिषविदों का कहना है कि पुष्य नक्षत्र के स्वामी देवगुरु ब्रहस्पति हैं और इस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना अत्यंत लाभकारी होता है। यदि व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से ब्रहस्पति को पूज नहीं सकता तो सद्गुरु या अपने आचार्य को देखकर उनका पूजन कर सकते हैं। इस दिन श्रद्धापूर्वक 108 मोती की माला लेकर ब्रहस्पति मंत्र का जप करने से नक्षत्र देवता प्रसन्न होते हैं और जीवन में धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मंत्र का उच्चारण इस प्रकार करना चाहिए – ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नमः |

धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में पुष्य नक्षत्र को विशेष महत्व दिया गया है। ‘शिव पुराण’ में इसे भगवान शिव की विभूति बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि पुष्य नक्षत्र अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोषों को समाप्त करता है और निष्फल कार्यों को फलदायी बनाता है। इसे सर्वसिद्धिकर नक्षत्र भी कहा गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस नक्षत्र में किए गए जप, दान, पुण्य, और ध्यान से व्यक्ति को अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा, इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और कर्ता को धन, संतान, और अन्य ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

रविपुष्यमृत योग का प्रभाव केवल आध्यात्मिक लाभों तक सीमित नहीं है। इस दिन किए गए कर्मों से मन, बुद्धि और जीवन में स्थिरता आती है। व्यक्ति मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन किए गए दान और सेवा का प्रभाव अत्यंत प्रभावशाली होता है। यह योग विशेष रूप से उन लोगों के लिए भी लाभकारी है जो अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता, व्यापारिक लाभ या पेशेवर सफलता की इच्छा रखते हैं।

हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इस योग में विवाह या उससे संबंधित मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। शिव पुराण और विद्येश्वर संहिता के अध्याय 10 के अनुसार विवाह या अन्य मांगलिक कार्य पुष्य नक्षत्र में अनुकूल नहीं माने जाते। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन विवाह संबंधी आयोजन करने से शुभ फल नहीं मिलता और अनिश्चित परिणाम हो सकते हैं। इसलिए इस दिन केवल जप, पूजन, दान और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि रविपुष्यमृत योग का प्रभाव सूर्य और गुरु के संयोजन से जुड़ा है। सूर्य जीवनदायिनी ऊर्जा का प्रतीक हैं और ब्रहस्पति ज्ञान, वैभव और नैतिकता का प्रतीक। इस योग में सूर्य और ब्रहस्पति की ऊर्जा मिलकर व्यक्ति के जीवन में शुभ अवसर और सकारात्मक बदलाव लाती है। यह योग उन जातकों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है जो लंबे समय से किसी काम में अड़चन या बाधाओं का सामना कर रहे हैं।

धार्मिक और ज्योतिषिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन किए गए जप और पूजन से व्यक्ति के मन में उत्साह, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है। साथ ही, जीवन में नई योजनाओं और कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से 108 मोती की माला लेकर ब्रहस्पति मंत्र का जप करता है, तो उसके जीवन में स्थिरता और समृद्धि बनी रहती है।

इस योग का महत्व केवल व्यक्तिगत जीवन तक ही सीमित नहीं है। समाजिक और पारिवारिक जीवन में भी इसके प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है। व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ संबंधों में सुधार और सामंजस्य महसूस करता है। धर्म और आध्यात्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है और व्यक्ति अपने कर्मों को और अधिक निष्ठा और समर्पण के साथ करने लगता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि रविपुष्यमृत योग का प्रभाव उन लोगों पर भी पड़ता है जो आध्यात्मिक साधना, ध्यान और योग में रुचि रखते हैं। इस दिन ध्यान करने, मंत्र का जाप करने और सत्संग में भाग लेने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह योग न केवल व्यक्ति को जीवन में सफलता और ऐश्वर्य प्रदान करता है, बल्कि उसे मानसिक और आत्मिक रूप से भी सशक्त बनाता है।

इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि वे इस दिन अपने जीवन में शुभ फल प्राप्त करने के लिए ब्रहस्पति मंत्र का जप करें और साथ ही दान-पुण्य के कार्य करें। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दान करने से व्यक्ति को केवल आर्थिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि उसके जीवन में सुख, शांति और संतोष की भावना भी बढ़ती है।

आज का दिन उन लोगों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है जो अपनी शिक्षा, व्यापार या पेशेवर जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। रविपुष्यमृत योग के प्रभाव से उनके प्रयास सफल होंगे और उनके कार्यों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। वहीं, जो लोग लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए भी यह योग लाभकारी सिद्ध हो सकता है। ध्यान और जप के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने से उन्हें राहत और ऊर्जा का अनुभव होगा।

ज्योतिषाचार्यों का यह भी कहना है कि इस दिन किए गए श्राद्ध और पूजन कर्म से पितरों की तृप्ति होती है। इससे न केवल परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, बल्कि जीवन में संपत्ति और वैभव की प्राप्ति भी होती है। इस दिन किए गए किसी भी पुण्य कर्म का प्रभाव लंबी अवधि तक बना रहता है।

इस प्रकार, 1 फरवरी 2026 रविवार का रविपुष्यमृत योग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी इसके शुभ परिणामों की संभावना अधिक है। इस दिन ब्रहस्पति मंत्र का जप, पूजन, दान और ध्यान करने से समृद्धि, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव किया जा सकता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-