गाजियाबाद में कोरियाई ऑनलाइन लव गेम के खतरनाक जुनून ने ली तीन बहनों की जान, देशभर में मचा हड़कंप

गाजियाबाद में कोरियाई ऑनलाइन लव गेम के खतरनाक जुनून ने ली तीन बहनों की जान, देशभर में मचा हड़कंप

प्रेषित समय :22:18:09 PM / Wed, Feb 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

गाजियाबाद. तीन नाबालिग बहनों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है और इस घटना ने ऑनलाइन गेमिंग तथा डिजिटल प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि इन बहनों पर एक कथित कोरियाई ऑनलाइन “लव गेम” का गहरा प्रभाव था, जिसने उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित किया हो सकता है. यह मामला अब साइबर मनोविज्ञान, डिजिटल लत और किशोरों की मानसिक सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.

पुलिस के अनुसार यह घटना गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में हुई, जहां 16, 14 और 12 वर्ष की तीन बहनों ने अपने अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. शुरुआती जांच में सामने आया कि तीनों बहनें देर रात घर के पूजा कक्ष में खुद को बंद कर लिया था. इसके बाद उन्होंने एक कुर्सी की मदद से खिड़की तक पहुंच बनाई और एक के बाद एक नीचे कूद गईं. इस घटना ने परिवार, स्थानीय लोगों और प्रशासन को स्तब्ध कर दिया है.

जांच के दौरान पुलिस को घर से एक डायरी मिली, जिसमें कई स्केच, माफी संदेश और कोरियाई संस्कृति से जुड़ी कई बातें लिखी हुई थीं. डायरी में यह भी संकेत मिला कि तीनों बहनें खुद को भारतीय नहीं बल्कि “कोरियाई राजकुमारियां” मानने लगी थीं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मानसिक बदलाव लंबे समय तक एक ऑनलाइन गेम के प्रभाव में रहने के कारण हो सकता है.

सहायक पुलिस आयुक्त अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यह गेम कथित रूप से एक टास्क आधारित इंटरैक्टिव गेम था, जिसमें खिलाड़ी किसी काल्पनिक किरदार को अपनाते हैं और विभिन्न मिशन पूरे करते हैं. हालांकि अभी तक पुलिस उस विशेष ऐप की पहचान नहीं कर सकी है और इसके लिए मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच जारी है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञ मोबाइल डेटा और गेमिंग हिस्ट्री का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इस गेम की वास्तविक प्रकृति और प्रभाव को समझा जा सके.

जांच एजेंसियों के अनुसार तीनों बहनें पिछले दो से तीन वर्षों से इस गेम की आदी हो चुकी थीं. कोविड महामारी के दौरान जब स्कूल बंद हो गए थे और बच्चे घरों में सीमित हो गए थे, उसी दौरान उनकी गेमिंग गतिविधियां तेजी से बढ़ी थीं. बताया जा रहा है कि तीनों बहनें ज्यादातर समय एक साथ मोबाइल फोन पर गेम खेलती थीं और धीरे-धीरे यह गेम उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था.

परिवार के सदस्यों के अनुसार हाल के दिनों में माता-पिता ने बेटियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की थी, जिससे वे परेशान और तनावग्रस्त हो गई थीं. लड़कियों के पिता ने पुलिस को बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह गेम किसी प्रकार के टास्क या मानसिक प्रभाव से जुड़ा हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटियां अक्सर दक्षिण कोरिया जाने की इच्छा जताया करती थीं और वहां की संस्कृति को लेकर काफी उत्साहित रहती थीं.

इस मामले में ट्रांस-हिंडन क्षेत्र के डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में किसी विशेष ऐप का नाम नहीं है, लेकिन उसमें कोरियाई संस्कृति और गेम से जुड़े कई संकेत मिले हैं. वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने एक लड़की को पहले कूदते देखा और बाकी दो लड़कियां उसे बचाने की कोशिश में नीचे गिर गईं. हालांकि पुलिस इस बयान की भी जांच कर रही है और घटना के सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना है कि कोविड के बाद से तीनों बहनों की स्कूल उपस्थिति काफी कम हो गई थी. वे पढ़ाई में भी कम रुचि लेने लगी थीं और ज्यादातर समय डिजिटल माध्यमों में व्यस्त रहती थीं. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक वर्चुअल दुनिया में रहने से किशोरों की सोच और व्यवहार पर गहरा असर पड़ सकता है.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चे अपनी पहचान खोजने की प्रक्रिया में होते हैं और यदि वे किसी काल्पनिक दुनिया या गेम के किरदार से खुद को जोड़ लेते हैं तो इसका असर उनके वास्तविक जीवन पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों ने कहा कि टास्क आधारित गेम्स में अक्सर खिलाड़ी को चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक रूप से प्रभावित करने वाले मिशन दिए जाते हैं, जिससे खिलाड़ी मानसिक रूप से उस दुनिया में खो सकता है.

साइबर विशेषज्ञों ने इस घटना को डिजिटल लत के खतरनाक उदाहरण के रूप में बताया है. उनका कहना है कि कई ऑनलाइन गेम्स खिलाड़ियों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए मनोवैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं. इससे बच्चों और किशोरों में वास्तविकता और काल्पनिक दुनिया के बीच अंतर करने की क्षमता कमजोर हो सकती है.

इस घटना के बाद समाज में अभिभावकों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है. केवल मोबाइल फोन देने के बजाय बच्चों से बातचीत करना और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी बेहद आवश्यक है. बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, पढ़ाई से दूरी या सामाजिक गतिविधियों से अलगाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को भी डिजिटल सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए. इससे बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी मिल सकती है और वे डिजिटल दुनिया के खतरों को समझ सकते हैं.

गाजियाबाद की यह घटना प्रशासन और साइबर एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह गेम भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध है और क्या इसके जरिए अन्य बच्चों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी खतरनाक ऑनलाइन गतिविधि का पता चलता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

इस दुखद घटना ने यह भी दिखाया है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा केवल तकनीकी नियंत्रण से संभव नहीं है, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक सहयोग भी जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल व्यवहार पर ध्यान देना होगा.

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और मोबाइल डेटा, डायरी और अन्य सबूतों के आधार पर घटना के पीछे की पूरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही है. इस घटना ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल मनोरंजन और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-