* पं. प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 6367472963)
* शबरी जयन्ती - 8 फरवरी 2026, रविवार
* सप्तमी तिथि प्रारम्भ - 8 फरवरी 2026 को 02:54 एएम बजे
* सप्तमी तिथि समाप्त - 9 फरवरी 2026 को 05:01 एएम बजे
किसी भी देवी-देवता की भक्ति में भाषा से ज्यादा भाव का महत्व है, यही दर्शाती है शबरी जयंती.
कई श्रद्धालु पूजा में बैठते हैं किन्तु पूजा में उनका मन नहीं लगता... पूजा का भाव उत्पन्न नहीं होता है, ऐसे श्रद्धालुओं को संकल्प लेकर शबरी जयंती के अवसर पर भक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करने के साथ ही श्रीराम की आराधना करनी चाहिए.
धर्मधारणा के अनुसार... शबरी, श्रीराम की भक्त थी... श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाकर उनकी भक्ति को संपूर्णता प्रदान की, और इसीलिए... शबरी जयंती के अवसर पर श्रद्धालु व्रत-पूजा करके उनके प्रति आदर व्यक्त करते हैं.
शबरी जयंती के अवसर पर श्रीरामायण का पाठ किया जाता है.
धर्मकथाओं के संदर्भानुसार... श्रमणा का जन्म शबरी जाति के परिवार में हुआ... वह बचपन से ही भगवान श्रीराम की भक्त थीं, लेकिन विवाह के पश्चात उसके पति की असुर प्रकृति के कारण उसने घर का त्याग कर दिया... वह मातंग ऋषि के आश्रम में पहुंची, जहां उसका समय श्रीराम भक्ति में गुजरने लगा... वनवास के दौरान जब श्रीराम शबरी के वहां पहुंचे तो उसने एकत्रित किए गए बेरों को चखकर उसमें से मीठे बेर श्रीराम के लिए अलग रख दिए... श्रीराम ने वही मीठे बेर स्वीकार किए और इस तरह शबरी की भावभक्ति को संपूर्णता प्राप्त हुई!
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 7 फरवरी 2026
* यशोदा जयन्ती - 7 फरवरी 2026, शनिवार
* षष्ठी तिथि प्रारम्भ - 7 फरवरी 2026 को 01:18 एएम बजे
* षष्ठी तिथि समाप्त - 8 फरवरी 2026 को 02:54 एएम बजे
ब्रह्म मुहूर्त 05:32 ए एम से 06:23 ए एम, प्रातः सन्ध्या 05:57 ए एम से 07:14 ए एम, अभिजित मुहूर्त 12:27 पी एम से 01:12 पी एम, विजय मुहूर्त 02:41 पी एम से 03:26 पी एम, गोधूलि मुहूर्त 06:22 पी एम से 06:48 पी एम, सायाह्न सन्ध्या 06:25 पी एम से 07:41 पी एम, अमृत काल 07:31 पी एम से 09:15 पी एम, निशिता मुहूर्त 12:23 ए एम से 01:15 ए एम, सर्वार्थ सिद्धि योग 02:28 ए एम से 07:14 ए एम, रवि योग 02:28 ए एम से 07:14 ए एम
* दिन का चौघड़िया
काल - 07:14 से 08:38
शुभ - 08:38 से 10:02
रोग - 10:02 से 11:26
उद्वेग - 11:26 से 12:49
चर - 12:49 से 02:13
लाभ - 02:13 से 03:37
अमृत - 03:37 से 05:01
काल - 05:01 से 06:25
* रात्रि का चौघड़िया
लाभ - 06:25 से 08:01
उद्वेग - 08:01 से 09:37
शुभ - 09:37 से 11:13
अमृत - 11:13 से 12:49
चर - 12:49 से 02:25
रोग - 02:25 से 04:01
काल - 04:01 से 05:38
लाभ - 05:38 से 07:14
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
आज का दिन: 7 फरवरी 2026, भक्ति में भाव का महत्व दर्शाती है... शबरी जयंती!
प्रेषित समय :21:05:51 PM / Fri, Feb 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

