मुंबई. मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने 44 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मेयर पद के लिए अपनी पार्टी की उम्मीदवार घोषित कर दी है। घाटकोपर की कॉर्पोरेटर ऋतु तावड़े को मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि शिंदे गुट शिवसेना के संजय घाड़ी को डिप्टी मेयर पद के लिए नामित किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला मुंबई की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और आगामी समय में महानगरपालिका की कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।
बीजेपी द्वारा अंतिम समय तक अपने उम्मीदवार के नाम को गोपनीय रखा गया था, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। शनिवार को मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने पार्टी मुख्यालय में औपचारिक घोषणा करते हुए रितु तावड़े के नाम पर मुहर लगाई। उम्मीदवार के नाम की घोषणा होते ही यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर मराठा समाज से आने वाली महिला नेता को आगे कर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। यह कदम विशेष रूप से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मराठी अस्मिता वाले राजनीतिक एजेंडे को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार मेयर पद महिला सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था, जिसके बाद बीजेपी के अंदर कई महिला कॉर्पोरेटरों के नाम संभावित उम्मीदवारों के रूप में चर्चा में थे। इनमें प्रीति साटम, अलका केरकर, राजश्री शिरवाड़कर और रितु तावड़े प्रमुख नाम थे, लेकिन अंततः पार्टी नेतृत्व ने तावड़े पर भरोसा जताया। रितु तावड़े लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रही हैं और उन्हें संगठन और प्रशासन दोनों का अनुभव माना जाता है। यही कारण रहा कि पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। चुनाव परिणामों के अनुसार बीजेपी को 89 सीटें मिलीं जबकि शिंदे गुट शिवसेना को 29 सीटें प्राप्त हुईं। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट के कॉर्पोरेटर अजित रावराने ने भी महायुति गठबंधन को समर्थन दिया है। इस समर्थन के बाद गठबंधन की कुल संख्या 119 सीटों तक पहुंच गई है, जिससे महानगरपालिका में सत्ता पर काबिज होना लगभग तय माना जा रहा है। इस राजनीतिक स्थिति ने बीजेपी को 44 वर्षों बाद अपना मेयर बनाने का अवसर प्रदान किया है।
मेयर चुनाव 11 फरवरी को आयोजित किया जाना है, लेकिन शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट द्वारा चुनाव में उम्मीदवार न उतारने की घोषणा ने मुकाबले को लगभग समाप्त कर दिया है। पार्टी नेता किशोरी पेडनेकर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी मराठी पहचान और सम्मान की राजनीति को प्राथमिकता देती है और मराठी उम्मीदवार के सामने चुनाव लड़ना उचित नहीं समझती। उनके इस फैसले को राजनीतिक रणनीति और परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया निर्णय माना जा रहा है। इस स्थिति के कारण ऋतु तावड़े और संजय घाड़ी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
रितु तावड़े का राजनीतिक सफर भी काफी रोचक रहा है। वह मूल रूप से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई थीं, लेकिन वर्ष 2012 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई और नगर निगम की शिक्षा समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वर्ष 2017 के नगर निगम चुनाव में उन्होंने वार्ड 127 से चुनाव लड़ा था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी और 2026 के चुनाव में वार्ड 132 से शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट की उम्मीदवार क्रांति मोहिते को 16 हजार से अधिक वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक मजबूती साबित की।
रितु तावड़े ने मेयर पद के उम्मीदवार घोषित होने के बाद शहर के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण वादे किए हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी प्राथमिकता मुंबई को गड्ढा मुक्त सड़कें देने, भ्रष्टाचार समाप्त करने, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने और ट्रैफिक व स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने की होगी। इसके साथ ही उन्होंने शहर को सुरक्षित बनाने और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर भी कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है। उनके इन बयानों को बीजेपी की आगामी प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल महानगरपालिका तक सीमित नहीं है बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा संदेश देता है। बीजेपी लंबे समय से मुंबई की सत्ता में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पहले शिवसेना के साथ गठबंधन के कारण पार्टी को मेयर पद नहीं मिल पाया था। अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच बीजेपी को यह अवसर मिला है, जिससे पार्टी की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी और शिंदे शिवसेना गठबंधन ने चुनाव जीतने के बाद प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि नई प्रशासनिक व्यवस्था पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता देगी। मुंबई जैसे बड़े महानगर में प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, इसलिए जनता की अपेक्षाएं भी नई प्रशासनिक टीम से काफी अधिक हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता संतुलन के बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बीजेपी अपनी प्रशासनिक योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है तो आने वाले चुनावों में इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक भविष्य को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मुंबई महानगरपालिका देश की सबसे समृद्ध नगर निकायों में से एक मानी जाती है और इसका बजट कई राज्यों के बजट के बराबर होता है। ऐसे में इस संस्था पर नियंत्रण राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 44 वर्षों बाद बीजेपी का मेयर पद पर दावा पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले समय में यह निर्णय मुंबई की प्रशासनिक दिशा और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

