जबलपुर. केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर आयुक्तालय द्वारा टैक्स चोरी के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है, जिससे विंध्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. विभाग की एंटी इवेजन टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर सीधी, सतना और कटनी जिलों में एक साथ नौ अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इस कार्रवाई को जीएसटी विभाग की अब तक की बड़ी और निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन स्थानों पर संचालित कई फर्में केवल कागजों में अस्तित्व रखती थीं और उनका उपयोग कोयले की फर्जी बिलिंग के जरिए आईटीसी का अनुचित लाभ लेने के लिए किया जा रहा था.
केंद्रीय जीएसटी आयुक्त लोकेश लिल्हारे के निर्देशन और नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था ताकि आरोपियों को भनक न लग सके. विभाग को पहले से सूचना मिल रही थी कि विंध्य क्षेत्र में कुछ फर्में केवल नाम मात्र के लिए पंजीकृत हैं और उनका वास्तविक संचालन कहीं भी नहीं हो रहा है. इन फर्मों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जी बिल बनाकर आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा था. इसी सूचना के आधार पर विभाग ने कई दिनों तक गुप्त रूप से निगरानी और दस्तावेजों का अध्ययन किया और जब पर्याप्त प्रमाण जुट गए तब एक साथ कार्रवाई की गई.
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को जो तथ्य मिले, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. जिन नौ फर्मों की जांच की गई उनमें से आठ फर्में अपने पंजीकृत पते पर पूरी तरह गैर-परिचालन पाई गईं. जांच टीम जब इन पते पर पहुंची तो वहां कोई कार्यालय, कर्मचारी या व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली. कई स्थानों पर तो स्थानीय लोगों ने भी ऐसी किसी फर्म के अस्तित्व से अनभिज्ञता जताई. इससे स्पष्ट हो गया कि इन फर्मों का गठन केवल फर्जी दस्तावेज तैयार कर टैक्स चोरी करने के उद्देश्य से किया गया था.
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन फर्मों के माध्यम से कोयले की खरीद और बिक्री के नाम पर बड़ी मात्रा में फर्जी बिल तैयार किए जा रहे थे. इन बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था और कई अन्य कंपनियों को भी यह लाभ पास किया जा रहा था. विभाग को आशंका है कि इस रैकेट का दायरा केवल तीन जिलों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार अन्य राज्यों और जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं. फिलहाल विभाग सभी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रहा है.
जिन फर्मों पर कार्रवाई की गई उनमें सीधी जिले की मेसर्स महादेव ट्रेडर्स, मिश्रा ट्रेडिंग कंपनी, गायत्री एंटरप्राइजेज, श्री बालाजी एसोसिएट और आदित्य फिलिंग स्टेशन शामिल हैं. इसके अलावा कटनी जिले की जय श्री बालाजी कोल ट्रेडर्स और कुमार ट्रेडिंग कंपनी तथा सतना जिले की रिशाल एसोसिएट्स और भव्यांश सेल्स एंड लॉजिस्टिक्स पर भी विभाग ने कार्रवाई की है. इन सभी फर्मों के दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.
जीएसटी अधिकारियों के अनुसार अब इन फर्मों द्वारा जारी किए गए बिलों और पास की गई आईटीसी की विस्तार से जांच की जा रही है. विभाग इस बात का आकलन करने में जुटा है कि इस पूरे रैकेट के कारण सरकारी राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा है. प्रारंभिक अनुमान के अनुसार नुकसान की राशि काफी बड़ी हो सकती है, हालांकि अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में अन्य कंपनियों या व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
आयुक्त लोकेश लिल्हारे ने इस कार्रवाई को टैक्स प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जीएसटी विभाग टैक्स चोरी और फर्जी लेनदेन के खिलाफ लगातार निगरानी कर रहा है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. उन्होंने व्यापारियों और उद्योगपतियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार के फर्जी लेनदेन से दूर रहें. उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिकता है.
इस कार्रवाई के बाद विंध्य क्षेत्र के व्यापारिक समुदाय में भी हलचल देखी जा रही है. कई व्यापारियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि फर्जी कंपनियों के कारण ईमानदारी से व्यापार करने वालों को नुकसान उठाना पड़ता है. वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार फर्जी आईटीसी रैकेट देशभर में एक बड़ी चुनौती बन चुका है और इसे रोकने के लिए लगातार निगरानी और तकनीकी जांच की आवश्यकता है.
सूत्रों के अनुसार विभाग अब इस रैकेट से जुड़े बैंक खातों और लेनदेन की भी जांच कर रहा है. कई खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिलने की संभावना जताई जा रही है. यदि जांच में धन शोधन या अन्य आर्थिक अपराधों के प्रमाण मिलते हैं तो मामला प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियों को भी सौंपा जा सकता है. विभाग यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि इन फर्जी फर्मों के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और किस स्तर तक यह नेटवर्क फैला हुआ था.
जीएसटी विभाग की इस कार्रवाई को सरकार की टैक्स चोरी के खिलाफ सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में विभाग ने तकनीकी संसाधनों और डेटा विश्लेषण के माध्यम से ऐसे कई मामलों का खुलासा किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निगरानी और डेटा मिलान के कारण अब फर्जी कंपनियों के लिए लंबे समय तक बच पाना मुश्किल होता जा रहा है.
फिलहाल विभाग की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है. अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो अन्य जिलों में भी छापेमारी की जा सकती है. इस पूरे मामले ने विंध्य क्षेत्र में टैक्स चोरी के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन की सख्ती का स्पष्ट संदेश भी दिया है. जीएसटी विभाग ने साफ किया है कि टैक्स चोरी और फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

