आज का दिन: 9 फरवरी 2026, जानकी जयंती पर जानकी स्तोत्र पाठ से मिलती है सर्वकष्ट मुक्ति!

आज का दिन: 9 फरवरी 2026, जानकी जयंती पर जानकी स्तोत्र पाठ से मिलती है सर्वकष्ट मुक्ति!

प्रेषित समय :21:33:18 PM / Sun, Feb 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 6367472963)
* जानकी जयन्ती - 9 फरवरी 2026, सोमवार
* अष्टमी तिथि प्रारम्भ - 9 फरवरी 2026 को 05:01 एएम बजे
* अष्टमी तिथि समाप्त - 10 फरवरी 2026 को 07:27 एएम बजे

जानकी जयंती पर्व, माताश्री सीता की आराधना का विशेष अवसर है.
यदि प्रतिदिन संभव नहीं हो तो इस अवसर पर जानकी स्तोत्र पाठ से सर्वकष्ट मुक्ति प्राप्त होती है.
देवी लक्ष्मी की अवतार मातश्री जानकी का ही नाम सीता है, जिनका प्राकट्य भूमि से हुआ था और इसी कारण से वे सीता कहलाई.
राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया था इसीलिए उनका नाम जानकी पड़ा. 
देवी सीता का शुभ-विवाह भगवान श्रीराम के साथ हुआ था. 
माताश्री जानकी की आराधना से संकट के समय में धैर्य धारण करने की क्षमता प्राप्त होती है!
॥ जानकी माता आरती ॥
आरती कीजै श्रीजनक लली की.
राममधुपमन कमल कली की॥
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
रामचन्द्र, मुखचन्द्र चकोरी.
अन्तर साँवर बाहर गोरी.
सकल सुमन्गल सुफल फली की॥
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
पिय दृगमृग जुग-वन्धन डोरी,
पीय प्रेम रस-राशि किशोरी.
पिय मन गति विश्राम थली की॥
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
रूप-रास गुननिधि जग स्वामिनि,
प्रेम प्रवीन राम अभिरामिनि.
सरबस धन हरिचन्द अली की॥
आरती कीजै श्रीजनक लली की...॥
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 9 फरवरी 2026
* जानकी जयन्ती, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

ब्रह्म मुहूर्त 05:31 ए एम से 06:22 ए एम, प्रातः सन्ध्या 05:56 ए एम से 07:13 ए एम, अभिजित मुहूर्त 12:27 पी एम से 01:12 पी एम, विजय मुहूर्त 02:42 पी एम से 03:26 पी एम, गोधूलि मुहूर्त 06:23 पी एम से 06:49 पी एम, सायाह्न सन्ध्या 06:26 पी एम से 07:43 पी एम, अमृत काल 10:04 पी एम से 11:51 पी एम, निशिता मुहूर्त 12:24 ए एम (10 फरवरी 2026) से 01:15 ए एम (10 फरवरी 2026)
* दिन का चौघड़िया
अमृत - 07:13 से 08:37
काल - 08:37 से 10:01
शुभ - 10:01 से 11:25
रोग - 11:25 से 12:49
उद्वेग - 12:49 से 02:14
चर - 02:14 से 03:38
लाभ - 03:38 से 05:02
अमृत - 05:02 से 06:26
* रात्रि का चौघड़िया
चर - 06:26 से 08:02
रोग - 08:02 से 09:38
काल - 09:38 से 11:13
लाभ - 11:13 से 12:49
उद्वेग - 12:49 से 02:25
शुभ - 02:25 से 04:01
अमृत - 04:01 से 05:37
चर - 05:37 से 07:13
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-