डीए भुगतान को लेकर पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन की मांग तेज

डीए भुगतान को लेकर पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन की मांग तेज

प्रेषित समय :21:36:03 PM / Sun, Feb 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता.महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान को लेकर पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन की मांग करते हुए रविवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार पर अदालत के निर्देशों को लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया।

सरकारी कर्मचारियों का यह प्रदर्शन मध्य कोलकाता के सुभाष मुलिक स्क्वायर से शुरू होकर रानी रश्मोनी रोड तक पहुंचा। इस दौरान कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लंबित डीए का भुगतान जल्द करने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 31 मार्च तक लंबित महंगाई भत्ते का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान किया जाए। अदालत के इस फैसले के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार जल्द कार्रवाई करेगी, लेकिन अब तक भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है।

संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने कहा कि डीए कर्मचारियों का अधिकार है और इसे रोककर उनके श्रम के मूल्य को कम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि लंबित राशि का भुगतान किया जाता है तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। उनके अनुसार, कर्मचारियों के हाथ में पैसा आने से बाजार में खर्च बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

इस प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान भी शामिल हुए। उन्होंने राज्य सरकार पर कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए जल्द भुगतान करना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में अंतरिम बजट के दौरान सरकारी कर्मचारियों के लिए चार प्रतिशत डीए बढ़ाने की घोषणा की थी। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी लंबित डीए की समस्या का समाधान नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस मामले की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो कानूनी सलाह के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने भी कहा कि सरकार के पास अभी समय है और वह अदालत के आदेश के अनुरूप उचित कदम उठाएगी।

डीए को लेकर चल रहा यह विवाद लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र और अन्य राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल में डीए का अंतर काफी ज्यादा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

फिलहाल, कर्मचारियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार कानूनी और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन कर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किस तरह और कब तक करती है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-