मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास पर हुई फायरिंग की साजिश से जुड़े मामले में सामने आए नए खुलासों ने पुलिस की चौकसी और दावों की पोल खोल दी है। घटना को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन फायरिंग करने वाला आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, जिस स्कूटर और हथियार का इस्तेमाल इस वारदात के लिए किया गया, वह मुंबई के व्यस्त इलाकों में से एक विले पार्ले रेलवे स्टेशन के बाहर कई दिनों तक खड़ा रहा। हैरानी की बात यह है कि स्कूटर की डिक्की में पिस्तौल रखी गई थी, इसके बावजूद न तो स्थानीय पुलिस, न ट्रैफिक पुलिस और न ही गश्ती दल को कोई शक हुआ।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 जनवरी 2026 को आरोपी सिद्धार्थ येनपुरे और समार्थ पुणे से एक होंडा डियो स्कूटर मुंबई लाए थे। इसी स्कूटर को विले पार्ले स्टेशन के बाहर खड़ा कर शूटर के लिए तैयार रखा गया। बताया जा रहा है कि शूटर बिहार का रहने वाला है और वह अपने चार से पांच साथियों के साथ मुंबई में रुका हुआ था। इस दौरान आरोपियों ने रोहित शेट्टी के घर की तीन से चार बार रेकी की, इलाके का जायजा लिया और हमले की पूरी तैयारी की।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे इलाके में हुआ जहां सीसीटीवी कैमरे, नियमित पुलिस गश्त और ट्रैफिक निगरानी की व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद संदिग्ध स्कूटर कई दिनों तक यूं ही खड़ा रहा और किसी भी एजेंसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या निगरानी तंत्र वास्तव में सक्रिय है या सिर्फ कागजों तक सीमित है।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी स्वप्निल सकट से एक पिस्तौल, तीन मैगजीन और एक एयर गन बरामद की है। पुलिस का कहना है कि ये हथियार हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपी असराम फसाले ने मुख्य साजिशकर्ता और फरार आरोपी शुभम रमेश्वर लोंकार के निर्देश पर स्वप्निल को सौंपे थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में किया गया था।
इन खुलासों के बाद मुंबई पुलिस की उस छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें वह हर बड़े आयोजन, वीआईपी मूवमेंट और संभावित खतरे के दौरान हाई अलर्ट का दावा करती है। इस मामले में आरोपियों का शहर में खुलेआम घूमना, बार-बार रेकी करना और हथियारों के साथ तैयारी करना, लेकिन किसी का ध्यान न जाना, सुरक्षा तंत्र की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।
विले पार्ले स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाके में अवैध पार्किंग का लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाना भी आलोचना का विषय बन गया है। आम नागरिकों के वाहनों पर तुरंत कार्रवाई करने वाली ट्रैफिक पुलिस इस मामले में क्यों चुप रही, यह सवाल भी उठ रहा है। क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं, या फिर इस मामले में लापरवाही बरती गई?
घटना ने आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। यदि एक नामी फिल्म निर्देशक के घर की कई बार रेकी हो सकती है और हथियारों से लैस आरोपी बेखौफ घूम सकते हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है, यह सवाल हर मुंबईकर के मन में है।
अब तक यह भी साफ नहीं हो पाया है कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की गतिविधियां क्यों नहीं पकड़ी गईं, बीट मार्शल और गश्ती दल ने संदिग्ध गतिविधियों को क्यों नहीं पहचाना और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में कहां चूक हुई।
हालांकि मुंबई क्राइम ब्रांच फरार शूटर और मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन इस पूरे मामले ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय होगी, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
फिलहाल, रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की यह साजिश मुंबई की सुरक्षा पर एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या महानगर की सुरक्षा व्यवस्था वाकई मजबूत है या अब तक सिर्फ किस्मत के सहारे चल रही थी।
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