विद्युत पेंशनर्स का आंदोलन 11 फरवरी को शक्ति भवन रोड पर धरना प्रदर्शन की घोषणा

विद्युत पेंशनर्स का आंदोलन 11 फरवरी को शक्ति भवन रोड पर धरना प्रदर्शन की घोषणा

प्रेषित समय :22:35:39 PM / Mon, Feb 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर.  विद्युत पेंशनर्स के लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया गया है। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए धरना एवं प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। विद्युत पेंशनर्स हित रक्षक संघ, जबलपुर शाखा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.प्र. वि. मं. पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 11 फरवरी 2026, बुधवार को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक शक्ति भवन रोड स्थित बैरियर गेट पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा।

पेंशनर्स का कहना है कि वर्षों से उनकी मूलभूत मांगें लंबित पड़ी हैं, लेकिन अब तक सरकार और संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के चलते पेंशनर्स को एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस धरना एवं प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विद्युत पेंशनर्स के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।

विद्युत पेंशनर्स हित रक्षक संघ के अनुसार, इस आंदोलन के माध्यम से दो प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। पहली और सबसे अहम मांग विद्युत पेंशनर्स की पेंशन की गारंटी सुनिश्चित करने और ट्रेजरी के माध्यम से नियमित पेंशन भुगतान की है। पेंशनर्स का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में पेंशन भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे बुजुर्ग पेंशनर्स को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जीवन की संध्या में स्थायी और सुरक्षित पेंशन व्यवस्था उनका अधिकार है, न कि कोई अनुग्रह।

दूसरी प्रमुख मांग केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुरूप विद्युत पेंशनर्स को भी उसी तिथि से महंगाई राहत प्रदान करने की है, जिस तिथि से अन्य केंद्रीय और राज्य पेंशनर्स को इसका लाभ मिलता है। पेंशनर्स का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन विद्युत पेंशनर्स को महंगाई राहत देने में देरी की जाती है या एरियर का भुगतान समय पर नहीं किया जाता। इससे पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है और दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है।

पेंशनर्स संगठनों का यह भी कहना है कि वे वर्षों तक विद्युत विभाग में सेवा देकर प्रदेश के विकास में योगदान दे चुके हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कई बार ज्ञापन, पत्राचार और बैठकों के बावजूद उनकी मांगों पर केवल आश्वासन ही मिले हैं, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विद्युत पेंशनर्स हित रक्षक संघ, जबलपुर शाखा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य सरकार और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाना है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि इस आंदोलन के बाद भी उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

जबलपुर शाखा के प्रमुख पदाधिकारियों शिरीष नेरकर, देवेंद्र पांडेय, ए. कृष्णन अय्यर, सुब्रोतो बैनर्जी सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी विद्युत पेंशनर्स से इस धरना एवं प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह आंदोलन केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि सभी विद्युत पेंशनर्स के सम्मान, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। जितनी अधिक संख्या में पेंशनर्स इसमें भाग लेंगे, उतनी ही मजबूती से उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी।

पेंशनर्स का मानना है कि यदि उनकी मांगें मान ली जाती हैं, तो इससे न केवल वर्तमान पेंशनर्स को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए भी एक सुरक्षित और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। उनका कहना है कि पेंशन किसी भी कर्मचारी के जीवन का महत्वपूर्ण आधार होती है और इसमें किसी भी प्रकार की अनिश्चितता सामाजिक असुरक्षा को जन्म देती है।

धरना स्थल के रूप में शक्ति भवन रोड स्थित बैरियर गेट का चयन भी प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि यह स्थान विद्युत विभाग और प्रशासन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। पेंशनर्स का कहना है कि वे उसी स्थान पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे, जहां से उनकी समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जाती है।

कुल मिलाकर, 11 फरवरी को प्रस्तावित यह धरना एवं प्रदर्शन विद्युत पेंशनर्स के आक्रोश और उनकी लंबित मांगों का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस आंदोलन को किस तरह से लेते हैं और क्या पेंशनर्स की वर्षों पुरानी मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने आता है या नहीं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-