ज्योतिष शास्त्र की दुनिया से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनमोल सूत्र सामने आया है जो मांगलिक दोष विशेषकर आठवें घर के मंगल से प्रभावित जातकों के लिए जीवनदान साबित हो सकता है. सनातन परंपरा और अनमोल ज्योतिष सूत्रों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के आठवें भाव में मंगल विराजमान हो तो इसे सबसे कठिन मांगलिक दोषों में से एक माना जाता है जिसे 'अष्टम मंगल' की संज्ञा दी गई है. ज्योतिषविदों का दावा है कि इस दोष के निवारण के लिए यदि जातक का विवाह उसी व्यक्ति के साथ मंडप में दो बार संपन्न कराया जाए तो मंगल का नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है. यह अनूठा उपाय इन दिनों वैवाहिक अड़चनों का सामना कर रहे परिवारों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि यह बिना किसी अन्य जटिल अनुष्ठान के सीधे विवाह पद्धति में बदलाव के जरिए समाधान पेश करता है.
वैदिक ज्योतिष के गहन अध्ययन से यह तथ्य निकलकर आता है कि कुंडली का आठवां घर आयु, मृत्यु, और वैवाहिक जीवन के सौभाग्य का स्थान होता है. जब ऊर्जा और अग्नि का प्रतीक मंगल इस संवेदनशील घर में बैठता है तो इसे वैवाहिक सुख के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अष्टम मंगल जातक के जीवनसाथी के स्वास्थ्य और संबंधों की प्रगाढ़ता पर सीधा असर डालता है. अनमोल ज्योतिष सूत्र बताते हैं कि 'पुनर्विवाह' की यह प्रतीकात्मक प्रक्रिया वास्तव में मंगल की उस उग्र ऊर्जा को शांत करने का एक मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीका है. जब एक ही जोड़े का विवाह संस्कार दो बार दोहराया जाता है तो ज्योतिषीय दृष्टिकोण से पहले विवाह के साथ जुड़ा 'अशुभ योग' समाप्त मान लिया जाता है और दूसरे फेरों के साथ एक नए और दोषमुक्त जीवन की शुरुआत मानी जाती है.
इस सूत्र के पीछे छिपे तथ्यों को खंगाला जाए तो यह 'विवाह विच्छेद' की संभावना को टालने का एक प्राचीन सुरक्षा चक्र प्रतीत होता है. प्राचीन संहिताओं में वर्णन मिलता है कि यदि किसी जातक की कुंडली में वैधव्य या अलगाव का योग प्रबल हो तो प्रतीकात्मक रूप से पहले किसी निर्जीव वस्तु या भगवान विष्णु के साथ विवाह (कुंभ विवाह) कराया जाता था. लेकिन आधुनिक ज्योतिषीय परामर्शों में यह नया और प्रभावी सूत्र उभरा है कि यदि पात्र वही हो और विवाह की रस्में दो बार की जाएं तो इससे दांपत्य जीवन में आने वाले झंझावात कम हो जाते हैं. विद्वानों का तर्क है कि मंगल दोष से डरने के बजाय उसकी ऊर्जा को दिशा देना आवश्यक है. आठवें घर का मंगल जातक को साहसी और स्पष्टवादी बनाता है लेकिन यही गुण कभी-कभी रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर देते हैं. दो बार विवाह की यह विधि संस्कारिक रूप से जातक के भीतर एक नई जिम्मेदारी और समर्पण का भाव जागृत करती है.
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मंगल ग्रह की स्थिति का मानव जीवन पर भौतिक प्रभाव सिद्ध नहीं है लेकिन भारतीय संस्कृति में संस्कारों और संकल्पों की शक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के अनुष्ठान उन लोगों के मन से 'डर' को निकाल देते हैं जो ज्योतिष में अटूट विश्वास रखते हैं. जब एक जोड़ा पूरे विश्वास के साथ दोबारा विवाह की कसमें खाता है तो उनके बीच का आपसी भरोसा और अधिक मजबूत हो जाता है जो किसी भी सुखी वैवाहिक जीवन की आधारशिला है. अनमोल ज्योतिष सूत्र का यह रहस्योद्घाटन उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो मांगलिक होने के कारण सही जीवनसाथी चुनने में हिचकिचाते हैं. विशेषकर आठवें घर के मंगल वाले जातकों को अब इस सरल विधि से अपने वैवाहिक भविष्य को सुरक्षित करने का एक मार्ग मिल गया है.
अंततः यह विषय आस्था और ज्योतिषीय गणनाओं का संगम है. समाज में इस सूत्र के फैलने से उन पुरानी भ्रांतियों को भी चोट पहुंची है जिनमें मांगलिक जातक को दुर्भाग्य का सूचक माना जाता था. अब यह स्पष्ट हो रहा है कि ज्योतिष शास्त्र केवल डराने के लिए नहीं बल्कि समाधान खोजने के लिए है. आठवें घर का मंगल यदि दो बार विवाह के संकल्प से शांत होता है तो यह न केवल एक विधि है बल्कि रिश्तों को सहेजने का एक नया दृष्टिकोण भी है. ज्योतिषाचार्यों का परामर्श है कि इस विधि को अपनाते समय मन में शुद्ध संकल्प और जीवनसाथी के प्रति पूर्ण निष्ठा रखना अनिवार्य है क्योंकि बिना भाव के किया गया कोई भी अनुष्ठान निष्फल रहता है. इस ज्योतिषीय सूत्र ने भविष्य में होने वाले विवाहों के लिए एक नया द्वार खोल दिया है जहाँ ग्रहों की शांति के साथ-साथ रिश्तों की मजबूती पर भी समान जोर दिया जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

