जबलपुर. आरक्षित टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे बोर्ड ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब यात्रा के दौरान यात्रियों के समूह में से कम से कम एक व्यक्ति के पास मूल पहचान पत्र होना अनिवार्य है. यदि जांच के दौरान आईडी नहीं दिखाई जाती, तो पूरे समूह को 'बिना टिकट' माना जाएगा और रेलवे अधिनियम के तहत जुर्माना वसूला जाएगा. यह कदम फर्जी टिकटों और अवैध यात्रा पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है.
रद्द किया जा सकता है कोटा और रियायत
नए बदलाव के अनुसार,वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और छात्रों जैसे विशेष कोटे या रियायती दरों पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अब अधिक सावधान रहना होगा. यात्रा के दौरान उन्हें अपनी पात्रता साबित करने वाले वैध दस्तावेज साथ रखने होंगे. प्रमाण पत्र न होने की स्थिति में रियायत रद्द कर दी जाएगी और यात्री को पूरा किराया व भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. रेलवे का मानना है कि इससे आरक्षित सुविधाओं के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा.
सीमावर्ती इलाकों में ज्यादा फ़ोकस
पहचान सत्यापन के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी दस्तावेजों को मान्य किया गया है. डिजिटल आईडी केवल रेलवे की अनुमति पर ही स्वीकार होगी. विशेष रूप से भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश जैसे सीमावर्ती रूटों पर सुरक्षा के मद्देनजर जांच अधिक सख्त रहेगी. हालांकि अब टिकट की हार्ड कॉपी रखना जरूरी नहीं है, लेकिन बिना आईडी पकड़े जाने पर यात्री को अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतारा भी जा सकता है.
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