कानपुर में 10 करोड़ की लेम्बोर्गिनी हादसे पर नया मोड़, पिता ने पुलिस के दावे को दी चुनौती

कानपुर में 10 करोड़ की लेम्बोर्गिनी हादसे पर नया मोड़, पिता ने पुलिस के दावे को दी चुनौती

प्रेषित समय :17:54:45 PM / Tue, Feb 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कानपुर. पॉश ग्वालटोली इलाके में वीआईपी रोड पर रविवार दोपहर करीब 3.15 बजे हुए हाई-प्रोफाइल लेम्बोर्गिनी हादसे ने अब नया मोड़ ले लिया है. करीब 10 करोड़ रुपये कीमत वाली काले रंग की लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो कार से जुड़े इस मामले में आरोपी शिवम मिश्रा के पिता और तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए हादसे को लेकर अलग कहानी सामने रखी है. इस दुर्घटना में छह लोग घायल हो गए थे, जब तेज रफ्तार कार पहले एक ऑटो रिक्शा से टकराई और फिर सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारते हुए उसे कई फीट तक घसीटते हुए बिजली के खंभे से जा टकराई.

घटना के बाद पुलिस ने दिल्ली नंबर डीएल 11 सीएफ 4018 वाली इस महंगी स्पोर्ट्स कार को जब्त कर लिया है और तकनीकी जांच के लिए भेज दिया है. मामले में घायल तौफीक की शिकायत पर लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को जांच में शामिल किया गया है.

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि हादसे के समय कार कौन चला रहा था. पुलिस का दावा है कि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया है कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहे थे, जबकि उनके पिता केके मिश्रा ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कार में शिवम के साथ एक चालक भी मौजूद था और यह जांच का विषय है कि वाहन कौन चला रहा था.

केके मिश्रा ने बयान देते हुए कहा कि हादसे से एक दिन पहले कार में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे मैकेनिक ने ठीक कर दिया था. उन्होंने दावा किया कि अगले दिन शिवम और ड्राइवर कार की टेस्टिंग के लिए बाहर निकले थे. उन्होंने कहा कि जब दोनों सिविल लाइंस से लौट रहे थे, तभी शिवम अचानक बेहोश होने लगे और उनींदे हो गए. इसी दौरान ड्राइवर ने शिवम की हालत देखने के लिए एक हाथ हटाया, जिससे कार की गति धीमी हो गई और पीछे से आ रहे ऑटो रिक्शा ने टक्कर मार दी.

उन्होंने आगे बताया कि हादसे के बाद कार के दरवाजे और खिड़कियां ऑटोमैटिक लॉक हो गई थीं, जिसके कारण ड्राइवर बाहर नहीं निकल पाया. उनके मुताबिक, पीछे चल रहे सुरक्षा कर्मियों ने एसयूवी से उतरकर कार का शीशा तोड़ा और शिवम को बाहर निकाला. उन्होंने यह भी कहा कि घर लौटने के बाद शिवम की डॉक्टर से जांच कराई गई और बाद में उन्हें इलाज के लिए दिल्ली भेज दिया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है. उन्होंने दावा किया कि शिवम अभी इतनी स्थिति में नहीं हैं कि कानपुर आ सकें और डॉक्टरों के अनुसार उन्हें ठीक होने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है.

केके मिश्रा ने यह भी कहा कि उनके परिवार में कोई भी शराब या नशे का सेवन नहीं करता है और पुलिस द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने पुलिस आयुक्त के उस बयान को भी चुनौती दी जिसमें कहा गया था कि शिवम मिश्रा हादसे के समय कार चला रहे थे.

वहीं दूसरी ओर कानपुर पुलिस अपने दावे पर कायम है और उसका कहना है कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से यह साबित होता है कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहे थे. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि प्रारंभिक एफआईआर में कई बार अधूरी या गलत जानकारी हो सकती है, लेकिन जांच के दौरान जो साक्ष्य सामने आए हैं, वे शिवम मिश्रा की संलिप्तता को साबित करते हैं.

डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि हादसे के बाद जिस व्यक्ति को कार से बाहर निकाला गया, वह शिवम मिश्रा ही थे. उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद लोगों और बचाव कार्य में जुटे लोगों के वीडियो में भी यह देखा गया है कि ड्राइवर सीट से जिस व्यक्ति को निकाला गया, वह शिवम ही थे. उन्होंने कहा कि अदालत में वकीलों द्वारा दी गई दलीलों का पुलिस जांच पर कोई असर नहीं पड़ता और यदि अदालत कोई स्पष्टीकरण मांगती है तो पुलिस सभी तथ्य पेश करेगी.

पुलिस ने यह भी बताया कि नोटिस देने के लिए टीम शिवम मिश्रा के आर्य नगर स्थित आवास पर पहुंची थी, लेकिन वहां उनसे संपर्क नहीं हो पाया. शुरुआती एफआईआर में ड्राइवर की पहचान अज्ञात बताई गई थी, जिसे बाद में संशोधित करते हुए शिवम मिश्रा को आरोपी बनाया गया.

इस हादसे के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार काफी तेज थी और टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति लगभग दस फीट हवा में उछल गया था. स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की. दुर्घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया.

अब इस पूरे प्रकरण में तकनीकी जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज को अहम माना जा रहा है. पुलिस का कहना है कि वाहन की फोरेंसिक जांच से यह भी पता लगाया जाएगा कि कार में कोई तकनीकी खराबी थी या नहीं. वहीं परिवार की ओर से लगाए जा रहे दावों ने जांच को और जटिल बना दिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल यह मामला कानून और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रहा है और सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और महंगी स्पोर्ट्स कारों के उपयोग को लेकर सुरक्षा और जिम्मेदारी के सवाल खड़े कर रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-