जबलपुर. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की बरगी डायवर्जन परियोजना (बीडीपी) की दाईं तट नहर को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों की गूंज तेज हो गई है. कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय यादव ने परियोजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि जल्द ही नेता प्रतिपक्ष विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाएंगे.
पूर्व विधायक ने पत्रकारवार्ता में कहा कि करीब 25 साल बीत जाने के बावजूद जबलपुरए कटनीए सतना और रीवा जिलों की लगभग 2 लाख हेक्टेयर जमीन अब भी सिंचाई से वंचित है, जबकि परियोजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. संजय यादव के मुताबिक बरगी डायवर्जन योजना का उद्देश्य 2.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और जबलपुर-कटनी को 78 मिलियन गैलन प्रतिदिन घरेलू व औद्योगिक पानी उपलब्ध कराना था.
इसके तहत 227ण्438 क्यूमेक्स क्षमता की 197ण्40 किमी लंबी मुख्य नहरए 12 किमी लंबी स्लीमनाबाद टनल और करीब 2700 किमी वितरण नेटवर्क का निर्माण होना था. उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार देरी के कारण परियोजना की लागत 1991 के 1.101 करोड़ रुपए से बढ़कर 5.127 करोड़ से अधिक हो गई और लगभग 6 हजार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी है. घटिया निर्माण के कारण नहरें पूरी क्षमता से पानी छोड़े जाने से पहले ही टूटने लगीं.
स्लीमनाबाद टनल 18 साल बाद भी अधूरी-
स्लीमनाबाद टनल जिसका 2008 में 799 करोड़ रुपए का अनुबंध हुआ था और 40 माह में पूरा होना था, अब तक अधूरा है. इस पर 1500 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है. नवंबर 2025 में नर्मदा कंट्रोल बोर्ड ने 124.77 करोड़ की अतिरिक्त लागत मंजूर की थी और शर्त रखी थी कि 31 जनवरी 2026 तक काम पूरा न होने पर ठेकेदार से 2: प्रति सप्ताह वसूली होगी. आरोप है कि यह शर्त भी लागू नहीं की गई. संजय यादव ने कहा कि टनल के आगे बिना योजना नहर निर्माण होने से वे गाद से भरने लगी हैं और भविष्य में मरम्मत पर अलग से करोड़ों खर्च होंगे.
एक अधिकारी पर कई पदों की जिम्मेदारी-
पूर्व विधायक ने निगरानी और सुपरविजन में कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर डीएल वर्मा, जिन्हें पहले भ्रष्टाचार के मामले में दो वेतनवृद्धि रोकने की सजा मिल चुकी है. वर्तमान में एनवीडीए में पांच पदों का कार्यभार संभाल रहे हैं और वर्षों से टनल निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं.
बरगी डैम में लीकेज से खतरे की आशंका-
संजय यादव ने बरगी बांध में दरार और गैलरी से पानी के रिसाव को गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि सितंबर 2025 में केंद्रीय जल आयोग और राज्य के संयुक्त निरीक्षण में इसे बड़ी तकनीकी खामी माना गया था. जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया, लेकिन पांच महीने बाद भी मरम्मत शुरू नहीं हुई. उन्होंने आशंका जताई कि रिसाव नहीं रोका गया तो बरसात में बड़ा हादसा हो सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

