जबलपुर. जिले के सिहोरा क्षेत्र से इस वक्त की सबसे चिंताजनक खबर सामने आ रही है जहां क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली हिरन नदी अपने अस्तित्व की सबसे भयावह स्थिति से गुजर रही है. सोमवार की सुबह जब स्थानीय ग्रामीण नदी के तट पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए. कभी कल-कल बहने वाली यह नदी आज पूरी तरह सूखने की कगार पर खड़ी है और वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नदी के पात्र में अब मात्र तीन से चार दिन का ही पानी शेष रह गया है. यह संकट न केवल जलीय जीवों के लिए काल बन रहा है, बल्कि सिहोरा के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर के तेजी से गिरने का मुख्य कारण भी बन गया है.
स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जहां पहले नदी का बहाव काफी तेज और गहरा हुआ करता था, वहां अब स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि पानी महज पैर के पंजे तक ही सिमट कर रह गया है. इस प्राकृतिक त्रासदी के पीछे का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बेखौफ चल रहा अवैध रेत खनन बताया जा रहा है. जानकारों का मानना है कि निरंतर हो रहे मशीनी खनन के कारण नदी की प्राकृतिक गहराई और उसकी जल सोखने की क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. रेत के अंधाधुंध उठाव ने नदी के तल को कंक्रीट की तरह सख्त या कहीं-कहीं पूरी तरह खोखला कर दिया है, जिससे पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय तेजी से वाष्पित हो रहा है या आगे बह जा रहा है. नदी की यह हालत देख क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं, क्योंकि आने वाले भीषण गर्मी के दिनों में प्यास बुझाना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है.
हिरन नदी के इस सूखते स्वरूप ने सिहोरा के दर्जनों गांवों में जल संकट का बिगुल फूंक दिया है. ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंप और कुएं भी अब जवाब देने लगे हैं क्योंकि नदी के सूखने से वॉटर टेबल (जल स्तर) में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बावजूद अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है, जिसका सीधा परिणाम आज एक मरती हुई नदी के रूप में सबके सामने है. यदि अगले कुछ दिनों में नदी के संरक्षण और पानी के प्रबंधन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिहोरा क्षेत्र में आने वाले समय में भीषण जल त्रासदी मच सकती है. लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नदी के बहाव क्षेत्र को संरक्षित किया जाए और रेत माफियाओं पर नकेल कसी जाए ताकि हिरन नदी को दोबारा जीवन मिल सके.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

