भारत की 'विविधता में एकता' के आदर्श को स्थापित करने में हिंदी की सेतु-रूप भूमिका: प्रो. जुनारे

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प्रेषित समय :21:30:06 PM / Wed, Feb 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

गांधीनगर (व्हाट्सएप- 8875863494)
राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू), गांधीनगर में दो दिवसीय "अंतर-परिसरीय हिंदी प्रतियोगिता" का आयोजन हुआ. इस प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह संपन्न हुआ. इस अवसर पर एनएफएसयू-गांधीनगर के परिसर निदेशक प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे, कार्यपालक कुलसचिव सी.डी. जाडेजा; एनएफएसयू-गोवा के परिसर निदेशक प्रो. (डॉ.) नवीन कुमार चौधरी; एनएफएसयू-भोपाल के परिसर निदेशक प्रो. (डॉ.) सतीश कुमार तथा एनएफएसयू के राजभाषा अधिकारी वी.के. पाण्डेय मंच पर उपस्थित रहे.  

प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे, परिसर निदेशक, एनएफएसयू-गांधीनगर ने अपने उद्बोधन में कहा कि 'पद्मश्री' से सम्मानित डॉ. जे.एम. व्यास के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) ने राजभाषा में कार्यों को प्रोत्साहित करने हेतु इस "अंतर-परिसरीय हिंदी प्रतियोगिता" का आयोजन किया. हिंदी के संवर्धन के लिए कार्यरत एनएफएसयू स्थित राजभाषा विभाग के कार्यों की सराहना की जानी चाहिए कि इस स्पर्धा में एनएफएसयू के विभिन्न सात राज्यों के  परिसरों के प्रतिभागियों ने सक्रिय भाग लिया. हमारी राजभाषा हिंदी भारत की 'विविधता में एकता' के आदर्श को स्थापित करने में सेतु-रूप भूमिका निभा रही है. साथ ही प्रो. जुनारे ने एनएफएसयू स्थित राजभाषा विभाग की विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी जानकारी साझा की.  

"अंतर-परिसरीय हिंदी प्रतियोगिता" के अंतर्गत वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता, आशु भाषण प्रतियोगिता तथा गीत-गायन एवं मौलिक कविता प्रतियोगिता आयोजित की गईं. प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजेता प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.  
इस समापन समारोह का धन्यवाद-ज्ञापन प्रो. (डॉ.) सतीश कुमार, परिसर निदेशक, एनएफएसयू-भोपाल ने किया. 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-