मध्य प्रदेश में पहली बार पेपरलेस बजट पेश होगा, सरकार टैबलेट के जरिए खोलेगी विकास का खजाना

मध्य प्रदेश में पहली बार पेपरलेस बजट पेश होगा, सरकार टैबलेट के जरिए खोलेगी विकास का खजाना

प्रेषित समय :20:49:09 PM / Fri, Feb 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल.  मध्य प्रदेश में वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार 18 फरवरी को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही है और इस बार यह बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा। राज्य के इतिहास में यह पहली बार होगा जब बजट दस्तावेजों की मोटी किताबों की जगह डिजिटल माध्यम का उपयोग किया जाएगा। इस बदलाव के तहत वित्त मंत्री बजट भाषण के साथ केवल एक संक्षिप्त बजट हैंडआउट जारी करेंगे, जबकि बाकी सभी दस्तावेज टैबलेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल कागज की बचत होगी बल्कि बजट प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आधुनिक भी बनेगी।

सरकार द्वारा पेपरलेस बजट पेश करने का निर्णय राज्य में ई-ऑफिस और ई-कैबिनेट सिस्टम लागू होने के बाद लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल प्रणाली से कामकाज तेज होगा और बजट से जुड़ी जानकारी तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पहुंच आसान हो सकेगी। बजट में इस बार कृषि क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है, क्योंकि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है। कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार लाने के लिए कई नई योजनाओं और प्रावधानों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भी बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है।

सरकार ने इस वर्ष बजट निर्माण में कई नए वित्तीय प्रयोग भी किए हैं। इनमें रोलिंग बजट और ऑफ-बजट फाइनेंसिंग जैसी नई रणनीतियां शामिल हैं। रोलिंग बजट प्रणाली के तहत केवल एक वर्ष का बजट नहीं बल्कि तीन वर्षों का बजट प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसमें वित्त वर्ष 2026-27, 2027-28 और 2028-29 की योजनाओं को शामिल किया जाएगा और हर वर्ष इन योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली से योजनाओं को लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ लागू करने में सुविधा होगी और विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।

ऑफ-बजट फाइनेंसिंग व्यवस्था के तहत सरकार विकास परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं के लिए राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों और निगमों के फंड का उपयोग करेगी। यह खर्च सीधे राज्य के वार्षिक बजट में शामिल नहीं होगा, लेकिन राज्य की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा। वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकार को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे बड़ी परियोजनाओं को गति दी जा सकेगी। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इस व्यवस्था के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली आवश्यक होगी ताकि वित्तीय संतुलन बना रहे।

इस बार राज्य का बजट पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा होने का अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने के कारण बजट का आकार अपेक्षा से थोड़ा कम रह सकता है। जानकारी के अनुसार पहले जहां राज्य को केंद्रीय करों में 7.850 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलती थी, वह घटकर 7.347 प्रतिशत रह गई है। इस कटौती के कारण राज्य को लगभग आठ हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कटौती का असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा और आने वाले वर्षों में सरकार को संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।

राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक बजट का आकार 7.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट लगभग 4.21 लाख करोड़ रुपये था और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए इसे लगभग 4.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि केंद्रीय करों में कटौती के कारण इस लक्ष्य को हासिल करने में चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसके बावजूद सरकार विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की तलाश कर रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में बजट प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए कहा था कि इस बार का बजट वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बजट में शामिल योजनाओं का क्रियान्वयन समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ किया जाए।

पिछले वर्ष राज्य सरकार ने जीरो-बेस्ड बजटिंग की प्रक्रिया भी शुरू की थी, जिसमें प्रत्येक खर्च को नए सिरे से उचित ठहराना आवश्यक होता है। इस प्रणाली का उद्देश्य अनावश्यक खर्चों को कम करना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इस वर्ष रोलिंग बजट और ऑफ-बजट फाइनेंसिंग जैसे नए प्रयोगों को शामिल कर सरकार वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेपरलेस बजट प्रणाली प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे बजट प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और जानकारी तक पहुंच आसान बनेगी। साथ ही डिजिटल माध्यम के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डिजिटल प्रणाली को सफल बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत करना और अधिकारियों को प्रशिक्षित करना आवश्यक होगा।

राज्य में प्रस्तुत होने वाला यह पेपरलेस बजट प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बजट में किए गए प्रावधानों का प्रभाव राज्य के विकास और आर्थिक स्थिति पर किस प्रकार पड़ता है। फिलहाल इस ऐतिहासिक बजट को लेकर प्रदेश भर में उत्सुकता बनी हुई है और सभी की नजर 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होने वाले बजट पर टिकी हुई है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-