नई दिल्ली. सभी रेलवे जोनल को मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि ट्रेनों के टॉयलेट में फर्श के पास लगे पानी के नल और चेन से बंधे स्टेनलेस स्टील के मग को हटा दें. उनकी जगह जेट स्प्रे लगाने के निर्देश दिए हैं. यह फैसला उत्तर रेलवे में सफल ट्रायल के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य टॉयलेट में पानी जमा होने की समस्या कम करना और साफ-सफाई के मानकों को बेहतर बनाना है. इस संबंध में पमरे में भी आदेश आ चुका है और यहां की ट्रेनों में बदलाव की तैयारी की जा रही है.
रेलवे बोर्ड ने मंगलवार 17 फरवरी को जारी सर्कुलर में कहा है कि शौचालय के फर्श पर पानी जमा होने से गंदगी फैलती है और यात्रियों से लगातार नकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. समय के साथ फर्श असमतल हो जाता है, जिससे पानी के छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं और पानी ठहर जाता है. मंत्रालय ने बताया कि उत्तर रेलवे के दिल्ली और अंबाला मंडलों ने शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में इस व्यवस्था का सफल परीक्षण किया. इसके तहत फर्श के पास लगे नलों को डमी प्लग से बंद किया गया और चेन वाले स्टील मग हटा दिए गए. साथ ही हेल्थ फॉसेट (जेट स्प्रे) सही तरीके से लगाए गए.
सभी जोनों को 10 ट्रेनों को चयनित करने कहा
इस बदलाव से शौचालय का फर्श सूखा और साफ रखने में सुधार देखा गया. पानी जमा होने की शिकायतों में भी कमी आई है. इसी अनुभव के आधार पर सभी जोनों को सलाह दी गई है कि वे अपनी चुनी हुई दस ट्रेनों के एसी कोचों में इस व्यवस्था को पायलट परियोजना के रूप में लागू करें.
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