नई दिल्ली. “एआई महाशक्ति है” और “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” के संकल्प के साथ भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है. एमपी पोस्ट डॉट कॉम में प्रकाशित लेख में प्रधान संपादक सरमन नगेले ने लिखा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि मानव सभ्यता को नई दिशा देने वाली परिवर्तनकारी शक्ति बन चुकी है. उनके अनुसार एआई इंसानी क्षमताओं की सीमाओं को आगे बढ़ा रही है और विकासशील देशों के लिए पारंपरिक विकास मॉडल से आगे निकलने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही है.
लेख में कहा गया है कि 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन होगा, जिसका उद्देश्य “लोग, ग्रह और प्रगति” के सिद्धांतों पर आधारित एआई सहयोग को आगे बढ़ाना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 फरवरी को मुख्य प्लेनरी सत्र को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा है कि “भारत दुनिया का स्वागत करने के लिए उत्सुक है. हमने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की थीम चुनी है.” यह थीम एआई को मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास के साधन के रूप में स्थापित करने का संदेश देती है.
सरमन नगेले ने अपने लेख में उल्लेख किया है कि एआई की मल्टी-मॉडल और मल्टी-लिंगुअल क्षमताएं बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाने की क्षमता रखती हैं. एआई को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि समावेशी विकास और अवसरों के लोकतंत्रीकरण के रणनीतिक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह चिंता बनी हुई है कि एआई कुछ सीमित देशों और कंपनियों तक केंद्रित न रह जाए. इसलिए आवश्यक है कि कंप्यूटिंग, डेटा और फाउंडेशन मॉडल जैसे संसाधनों तक व्यापक और समान पहुंच सुनिश्चित की जाए.
लेख के अनुसार इस समिट में गूगल, ओपनएआई और एनवीडिया जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे. 15 से 20 देशों के शासन प्रमुख, 50 से अधिक विदेशी मंत्री और 40 से अधिक भारतीय व वैश्विक सीईओ की उपस्थिति प्रस्तावित है. अब तक 100 से अधिक देशों से 35 हजार से ज्यादा पंजीकरण हो चुके हैं. 500 से अधिक स्टार्टअप्स और करीब 500 सत्रों के माध्यम से एआई के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
भारत की एआई वर्कफोर्स, विशाल डिजिटल आबादी और डेटा खपत को समिट में वैश्विक रुचि का प्रमुख कारण बताया गया है. लेख में उल्लेख है कि दुनिया में उत्पन्न कुल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत भारत से आता है. जिस प्रकार भारत ने आईटी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई, उसी प्रकार अब एआई में भी भारत अग्रणी भूमिका निभा सकता है. विभिन्न रिपोर्टों में अमेरिका और चीन के बाद भारत को एआई अनुसंधान और कार्यान्वयन के क्षेत्र में प्रमुख देश के रूप में देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का हवाला देते हुए लेख में कहा गया है कि एआई को मानवीय प्रयासों का विकल्प नहीं, बल्कि क्षमताओं को बढ़ाने वाला उपकरण माना जाना चाहिए. उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि वे एआई का विवेकपूर्ण और नैतिक उपयोग करें. सतही उपयोग से केवल सीमित लाभ मिलता है, जबकि गहन और उद्देश्यपूर्ण उपयोग से ज्ञान और व्यक्तिगत विकास संभव है. एआई सीखने, रचनात्मकता और नवाचार का सहायक बने, इस पर विशेष बल दिया गया है.
प्रधानमंत्री ने भारतीय एआई स्टार्टअप्स को देश के भविष्य का सह-निर्माता बताया है. लेख में कहा गया है कि भारतीय एआई मॉडल नैतिकता, निष्पक्षता, पारदर्शिता और डेटा गोपनीयता के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए. “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” की भावना के अनुरूप भारत को ऐसा एआई ढांचा विकसित करना चाहिए जो किफायती, समावेशी और मितव्ययी नवाचार को बढ़ावा दे. स्थानीय और स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है.
फाउंडेशन मॉडल पिलर के तहत चयनित 12 भारतीय एआई स्टार्टअप्स ने स्वास्थ्य सेवा, बहुभाषी एलएलएम, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-वीडियो, इंजीनियरिंग सिमुलेशन, डेटा एनालिटिक्स और चिकित्सा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में अपने कार्य प्रस्तुत किए हैं. अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, जीएनएएनआई, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सॉकेट एआई, टेक महिंद्रा और जेडईएनटीईआईक्यू सहित कई स्टार्टअप्स इस पहल का हिस्सा हैं. सरकार ने इन नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है.
लेख में यह भी उल्लेख है कि समिट तीन प्रमुख सिद्धांतों—लोग, ग्रह और प्रगति—पर आधारित है. मानव पूंजी विकास, समावेशी एआई, सुरक्षित और विश्वसनीय ढांचा, नवाचार, विज्ञान सहयोग, संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक-सामाजिक कल्याण जैसे सात कार्य समूहों के माध्यम से चर्चा को संरचित किया जाएगा. समिट से पहले लगभग 300 प्री-समिट कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 25 से अधिक देशों में 57 अंतरराष्ट्रीय आयोजन शामिल हैं.
युवा एआई, एआई बाय हर और एआई फॉर ऑल जैसी वैश्विक पहलों में 135 देशों से 15 हजार से अधिक पंजीकरण और 4700 से अधिक प्रस्तुतियां प्राप्त हुई हैं. भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट एक्सपो, टिंकरप्रेन्योर चैलेंज और वैश्विक एआई पिच फेस्ट जैसे आयोजन इस सम्मेलन को व्यापक स्वरूप देंगे.
सरमन नगेले ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि एआई क्रांति में जो देश जितना आगे होगा, उसे उतना ही रणनीतिक लाभ मिलेगा. भारत के लिए यह अवसर है कि वह डिजिटल लोकतंत्र और भारतीय डिजिटल मेधा को वैश्विक मंच पर स्थापित करे. इस समिट से समावेशी और प्रभाव-संचालित वैश्विक एआई सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है.
एमपी पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सरमन नगेले डिजिटल मीडिया से पिछले 25 वर्षों से जुड़े हैं और तकनीकी व नीतिगत विषयों पर उनकी गहरी समझ इस लेख में परिलक्षित होती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

