अस्सी रिव्यू 2026 में भी महिला सुरक्षा पर करारा और झकझोर देने वाला सिनेमा

अस्सी रिव्यू 2026 में भी महिला सुरक्षा पर करारा और झकझोर देने वाला सिनेमा

प्रेषित समय :22:27:05 PM / Wed, Feb 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

निर्देशक अनुभव सिन्हा एक बार फिर सामाजिक यथार्थ को बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ के बाद तापसी पन्नू के साथ उनकी तीसरी फिल्म ‘अस्सी’ एक ऐसे मुद्दे को केंद्र में रखती है, जिससे देश लगभग हर दिन दो-चार होता है—बलात्कार। 20 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही यह फिल्म मनोरंजन से ज्यादा एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है।

कहानी दिल्ली में रहने वाली एक स्कूल टीचर परिमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार कानी कुसरुति ने निभाया है। परिमा अपने पति विनय और बेटे ध्रुव के साथ सामान्य जिंदगी जी रही होती है। एक रात स्कूल की पार्टी से लौटते समय पांच लोग उसका अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करते हैं और उसे रेलवे ट्रैक पर फेंक देते हैं। सुबह उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया जाता है और मामला अदालत तक पहुंचता है। कोर्ट में परिमा की ओर से केस लड़ती हैं वकील रावी, जिनकी भूमिका तापसी पन्नू ने निभाई है। फिल्म इसी सवाल के साथ आगे बढ़ती है कि क्या परिमा को न्याय मिल पाएगा।

अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी द्वारा लिखी गई यह कहानी भले ही काल्पनिक हो, लेकिन इसकी जड़ें हमारे समाज की सच्चाई में गहराई तक धंसी हुई हैं। फिल्म की शुरुआत ही इतनी असहज और विचलित करने वाली है कि दर्शक मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं कि आगे की यात्रा आसान नहीं होगी। फिल्म में यह तथ्य बार-बार सामने आता है कि देश में हर 20 मिनट में एक रेप रिपोर्ट होता है, और जिस दिन परिमा के साथ घटना हुई, उस दिन 80 शिकायतें दर्ज की गई थीं। हर 20 मिनट बाद स्क्रीन पर एक स्लेट के जरिए दर्शकों को याद दिलाया जाता है कि थिएटर के बाहर भी एक और अपराध दर्ज हो चुका है। यह प्रयोग फिल्म को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

‘अस्सी’ पारंपरिक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है। यहां ऊंची आवाजें और नाटकीय टकराव कम हैं, और यथार्थ अधिक है। जज बार-बार वकीलों को मर्यादा में रहने की हिदायत देते हैं, जिससे अदालत की वास्तविकता झलकती है। फिल्म यह भी दिखाती है कि इस घटना के बाद सिर्फ पीड़िता ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार की जिंदगी किस तरह बदल जाती है। खासकर बच्चे के नजरिए से दिखाए गए कुछ दृश्य बेहद मार्मिक हैं और दर्शकों को भीतर तक हिला देते हैं। हालांकि ‘छत्री मैन’ से जुड़ा सब-प्लॉट उतना प्रभाव नहीं छोड़ता और फिल्म की रफ्तार कुछ हिस्सों में धीमी महसूस होती है।

अभिनय की बात करें तो तापसी पन्नू एक बार फिर दमदार अंदाज में नजर आती हैं। एक दृढ़ और संवेदनशील वकील के रूप में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली है। लेकिन फिल्म की असली ताकत कानी कुसरुति हैं। परिमा के रूप में उन्होंने ऐसा सहज और सजीव अभिनय किया है कि दर्शक उनके दर्द से जुड़ जाते हैं। कई दृश्यों में उनका अभिनय आंखें नम कर देता है। बाल कलाकार अद्विक जायसवाल भी अपने किरदार में प्रभावित करते हैं। सहायक भूमिकाओं में रेवती, मनोज पाहवा, सतीश शर्मा, कुमुद मिश्रा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक, सीमा पाहवा और जतिन गोस्वामी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को मजबूती दी है।

संगीत की दृष्टि से रंजीत बारोट का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के माहौल को और तीव्र बनाता है। यह फिल्म के भावनात्मक और तनावपूर्ण क्षणों को गहराई देता है, बिना कहानी से ध्यान हटाए।

कुल मिलाकर ‘अस्सी’ एक सख्त, असहज और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है। यह मनोरंजन के पारंपरिक पैमानों पर नहीं उतरती, लेकिन एक जरूरी सामाजिक सवाल उठाती है। 2026 में भी महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे पर यह फिल्म दर्शकों को आईना दिखाती है। यदि आप गंभीर और यथार्थवादी सिनेमा पसंद करते हैं, तो ‘अस्सी’ जरूर देखी जानी चाहिए। इसे 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-