मेटल का रोबोडॉग बना, AI समिट में विवाद की वजह Galgotias यूनिवर्सिटी पर उठे सवाल

मेटल का रोबोडॉग बना, AI समिट में विवाद की वजह Galgotias यूनिवर्सिटी पर उठे सवाल

प्रेषित समय :22:05:54 PM / Wed, Feb 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स की दुनिया में तेजी से बढ़ती तकनीक के बीच एक मेटल से बना चार पैरों वाला रोबोट अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गया. नाम है रोबोडॉग. दिखने में कुत्ते जैसा, लेकिन न भौंकता है, न काटता है और न ही इसमें जान होती है. फिर भी यह मशीन कई बड़े और जोखिम भरे काम करने में सक्षम है. हाल ही में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में ऐसा ही एक रोबोडॉग विवाद का कारण बन गया, जिसने Galgotias यूनिवर्सिटी को मुश्किल में डाल दिया और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी.

16 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इस आयोजन का उद्देश्य भारत की AI क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना था. इसी दौरान Galgotias यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया, जिसका नाम ‘Orion’ बताया गया. यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने वीडियो में दावा किया कि यह उनके सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तकनीक जानने वालों ने पहचान लिया कि यह दरअसल चीनी कंपनी Unitree का Go2 मॉडल है, जो भारत में 2 से 3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध है.

इसके बाद विवाद गहराता चला गया. आरोप लगे कि एक आयातित प्रोडक्ट को इन-हाउस इनोवेशन के रूप में पेश किया गया. सोशल मीडिया पर मीम्स बनने लगे और भारत की इनोवेशन इमेज पर सवाल उठने लगे. मामला तब और तूल पकड़ गया जब कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में भारत की AI समिट में विदेशी उत्पाद को अपना बताने का जिक्र किया गया. विपक्षी नेताओं ने भी सरकार और आयोजन पर सवाल उठाए. हालांकि बाद में यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि उन्होंने कभी आधिकारिक रूप से यह दावा नहीं किया कि रोबोडॉग उनका स्वयं का निर्माण है और इसे केवल छात्रों की रिसर्च और डेमो के लिए रखा गया था. विवाद के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने के निर्देश दिए.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर यह रोबोडॉग है क्या. सरल शब्दों में कहें तो रोबोडॉग एक क्वाड्रुपेड यानी चार पैरों वाला रोबोट है, जिसे कुत्ते की तरह डिजाइन किया जाता है. यह उन्नत सेंसर, कैमरा, मोटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से चलता है. यह असली कुत्ते की तरह दौड़ सकता है, सीढ़ियां चढ़ सकता है, संतुलन बना सकता है और मुश्किल इलाकों में भी नेविगेट कर सकता है. इसमें दिमाग की जगह माइक्रोप्रोसेसर और AI एल्गोरिद्म काम करते हैं, जो इसे वातावरण को समझने और निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं.

रोबोडॉग का इतिहास काफी पुराना है. 1940 के दशक में अमेरिका की Westinghouse कंपनी ने Sparko नाम का एक शुरुआती रोबोट डॉग बनाया था, जो भौंक सकता था और पूंछ हिला सकता था. बाद में 1990 के दशक में जापान की Sony ने AIBO नामक रोबोटिक डॉग पेश किया, जो एक एंटरटेनमेंट और पालतू रोबोट के रूप में लोकप्रिय हुआ. AIBO अपने व्यवहार में बदलाव ला सकता था और मालिक के साथ इंटरैक्ट कर सकता था. हालांकि उस समय इसका उपयोग व्यावसायिक या औद्योगिक कार्यों के लिए नहीं था.

इसके बाद रोबोडॉग टेक्नोलॉजी ने नया मोड़ लिया जब अमेरिकी कंपनी Boston Dynamics ने BigDog और बाद में Spot जैसे उन्नत रोबोट विकसित किए. ये मशीनें असमतल सतहों पर संतुलन बना सकती थीं और भारी सामान ढो सकती थीं. मिलिट्री और इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए बनाए गए इन रोबोट्स ने दिखाया कि चार पैरों वाला रोबोट कठिन परिस्थितियों में पहियों वाले रोबोट से ज्यादा प्रभावी हो सकता है. आज Spot जैसे मॉडल प्लांट इंस्पेक्शन, डेटा कलेक्शन और खतरनाक स्थानों की जांच के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

चीनी कंपनी Unitree ने भी अपेक्षाकृत कम कीमत में उन्नत रोबोडॉग बाजार में उतारे हैं. Unitree Go2 जैसे मॉडल AI आधारित फॉलो मोड, ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस और रिमोट कंट्रोल क्षमताओं से लैस हैं. इन्हें रिसर्च, शिक्षा और एंटरटेनमेंट के साथ-साथ इंडस्ट्रियल सर्विलांस में भी उपयोग किया जा रहा है.

वर्तमान समय में रोबोडॉग का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो रहा है. आपदा प्रबंधन में ये रोबोट मलबे के बीच जाकर कैमरे और सेंसर की मदद से फंसे लोगों का पता लगा सकते हैं. मिलिट्री और सुरक्षा एजेंसियां इन्हें खतरनाक इलाकों की निगरानी और थर्मल इमेजिंग के लिए उपयोग करती हैं. इंडस्ट्रियल प्लांट्स में ये मशीनें गैस लीक या तकनीकी खामियों की जांच कर सकती हैं, जिससे मानव कर्मचारियों की जान जोखिम में नहीं पड़ती. कृषि अनुसंधान में भी इनका उपयोग फसल की निगरानी और डेटा संग्रह के लिए किया जा रहा है. कुछ देशों में इन्हें बुजुर्गों या दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता के लिए गाइड डॉग की तरह प्रयोग करने पर भी काम हो रहा है.

AI समिट में हुए विवाद ने जहां एक ओर पारदर्शिता और इनोवेशन के दावों पर बहस छेड़ दी, वहीं दूसरी ओर इसने रोबोडॉग जैसी उन्नत तकनीक को आम चर्चा का विषय बना दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के प्रदर्शन में स्पष्टता और सटीक जानकारी देना जरूरी है, ताकि देश की नवाचार छवि मजबूत बनी रहे. साथ ही यह भी सच है कि रोबोडॉग जैसी तकनीक भविष्य में सुरक्षा, आपदा राहत और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

फिलहाल Galgotias यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद शांत होने की कोशिश में है, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि AI और रोबोटिक्स के दौर में पारदर्शिता, मौलिक अनुसंधान और सही प्रस्तुति कितनी अहम है. मेटल का यह कुत्ता भले ही न भौंकता हो, न काटता हो, लेकिन तकनीकी और राजनीतिक बहसों में इसकी मौजूदगी ने हलचल जरूर मचा दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-