राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 35 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अब खुद उठाएंगे जनता की शिकायतों के फोन

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 35 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अब खुद उठाएंगे जनता की शिकायतों के फोन

प्रेषित समय :21:39:05 PM / Sun, Feb 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जयपुर.  राजस्थान सरकार ने जन शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 35 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सीधे पब्लिक हेल्पलाइन से जोड़ने का निर्देश दिया है. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास द्वारा जारी आदेश के अनुसार सचिव से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारी अब तय तिथियों पर राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन कॉल सेंटर में बैठेंगे और प्रतिदिन कम से कम 10 कॉल स्वयं सुनेंगे.

सरकारी आदेश के मुताबिक यह पहल जन शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है. अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 कॉल सेंटर में अपनी निर्धारित ड्यूटी के दौरान नागरिकों की शिकायतें सीधे सुनेंगे और जहां तक संभव होगा, मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे. माना जा रहा है कि इससे न केवल शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि अधिकारियों को जमीनी स्तर की समस्याओं की सीधी समझ भी विकसित होगी.

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी केवल कॉल सुनने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे लंबित शिकायतों की स्थिति, औसत निस्तारण समय, कम संतुष्टि स्तर वाली शिकायतों और विभिन्न श्रेणियों में दर्ज मामलों की भी समीक्षा करेंगे. इसके बाद उन्हें अपनी विजिट रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को प्रस्तुत करनी होगी. इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि शिकायत निवारण प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी दोनों मजबूत हों.

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय से शिकायतों के निस्तारण में देरी और संतुष्टि स्तर को लेकर सरकार के भीतर चर्चा चल रही थी. ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी भागीदारी से व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है. प्रशासनिक हलकों में इसे एक प्रयोगात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो शासन और जनता के बीच दूरी कम करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा स्वयं भी समय-समय पर 181 कॉल सेंटर का दौरा कर रहे हैं और आम नागरिकों की शिकायतें सीधे सुन रहे हैं. मुख्यमंत्री आवास पर नियमित जनसुनवाई भी आयोजित की जा रही है, जहां लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं. मुख्यमंत्री की इस सक्रियता को देखते हुए अब वरिष्ठ नौकरशाही को भी प्रत्यक्ष रूप से शिकायत निवारण प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया गया है.

राजस्थान संपर्क राज्य सरकार का ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं. शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को एसएमएस के जरिए एक यूनिक नंबर प्रदान किया जाता है, जिससे वह अपने मामले की स्थिति ट्रैक कर सकता है. इस प्रणाली का उद्देश्य शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है.

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सीधे कॉल सुनने से कई स्तरों पर सुधार की संभावना है. एक ओर जहां अधिकारियों को विभागीय कार्यप्रणाली में आ रही कमियों की प्रत्यक्ष जानकारी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर संबंधित विभागों पर भी त्वरित कार्रवाई का दबाव बनेगा. इससे लंबित मामलों में तेजी आने और नागरिक संतुष्टि में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर शिकायत प्रणाली में सबसे बड़ी चुनौती फीडबैक और निगरानी की होती है. जब उच्च स्तर के अधिकारी सीधे प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तो जवाबदेही स्वतः बढ़ती है. साथ ही, जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी यह संकेत होता है कि शीर्ष प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है.

हालांकि, कुछ प्रशासनिक जानकारों का यह भी कहना है कि इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कॉल के दौरान दर्ज शिकायतों पर बाद में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है. यदि केवल कॉल सुनने तक प्रक्रिया सीमित रही और फॉलो-अप मजबूत नहीं हुआ, तो अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाएंगे. इसलिए विजिट रिपोर्ट और समीक्षा प्रणाली को भी उतनी ही गंभीरता से लागू करना होगा.

राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब डिजिटल माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग हेल्पलाइन के जरिए अपनी समस्याएं दर्ज करा रहे हैं. ऐसे में शिकायतों की संख्या और उनकी जटिलता भी बढ़ी है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा है.

सरकार का मानना है कि वरिष्ठ स्तर की प्रत्यक्ष निगरानी से न केवल शिकायतों का निस्तारण तेज होगा, बल्कि नीति निर्माण में भी सुधार होगा, क्योंकि अधिकारियों को आम जनता की वास्तविक समस्याओं का सीधा फीडबैक मिलेगा. इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान भी आसान हो सकेगी.

 राजस्थान सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने और जनसुनवाई तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि यह पहल जमीन पर कितना असर दिखाती है और क्या इससे आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान पहले की तुलना में अधिक तेज और संतोषजनक हो पाता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-