डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी पर पीएम मोदी की चेतावनी के बाद #CyberSafety देशभर में ट्रेंड

डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी पर पीएम मोदी की चेतावनी के बाद #CyberSafety देशभर में ट्रेंड

प्रेषित समय :20:36:54 PM / Sun, Feb 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। ऑनलाइन ठगी और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया चेतावनी के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (एक्स) और थ्रेड्स पर #CyberSafety तेज़ी से ट्रेंड कर रहा है। देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच प्रधानमंत्री के बयान ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हजारों यूजर्स, साइबर विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि इस हैशटैग के जरिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने संबोधन में नागरिकों को आगाह करते हुए कहा कि साइबर ठग नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को डराकर, फर्जी कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर और खुद को सरकारी अधिकारी बताकर ठगी कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों का जिक्र किया, जिनमें अपराधी वीडियो कॉल या फोन कॉल के माध्यम से पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में शामिल है और उसे तुरंत भुगतान करना होगा, अन्यथा गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी इस तरह से फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं अपनाती।

प्रधानमंत्री की इस चेतावनी के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर #CyberSafety हैशटैग के साथ जागरूकता अभियान जैसा माहौल बन गया। एक्स पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि थ्रेड्स पर डिजिटल सुरक्षा से जुड़े इन्फोग्राफिक्स और सलाहें पोस्ट की गईं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक दबाव में लाते हैं और बड़ी रकम ट्रांसफर कराने में सफल हो जाते हैं।

साइबर अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट का तरीका बेहद सुनियोजित होता है। ठग पहले पीड़ित की बुनियादी जानकारी जुटाते हैं, फिर वीडियो कॉल के जरिए नकली पुलिस स्टेशन या वर्दीधारी व्यक्ति का दृश्य दिखाते हैं, जिससे पीड़ित को विश्वास हो जाता है कि मामला वास्तविक है। इसके बाद उसे बैंक खातों की जानकारी देने या तुरंत भुगतान करने के लिए कहा जाता है। कई मामलों में पीड़ित घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक जैसी स्थिति में रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भय और भ्रम की स्थिति पैदा करना इन अपराधियों की मुख्य रणनीति है।

प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आधिकारिक हैंडल्स से बार-बार यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करें, व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और निकटतम साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। कई यूजर्स ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर और शिकायत वेबसाइट के लिंक भी साझा किए हैं।

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते प्रचलन के साथ साइबर अपराधियों के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग से आने वाले समय में ठगी के तरीके और अधिक जटिल हो सकते हैं। ऐसे में साइबर साक्षरता को बढ़ावा देना समय की मांग बन गया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा में यह सुझाव भी सामने आया है कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर डिजिटल सुरक्षा की बुनियादी शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

एक्स और थ्रेड्स पर ट्रेंड कर रहे #CyberSafety के तहत कई प्रमुख हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया दी है। टेक कंपनियों से जुड़े पेशेवरों ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स को संदिग्ध अकाउंट्स और फर्जी प्रोफाइल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने सरकार से सख्त कानून और त्वरित न्याय की मांग भी की है, ताकि साइबर अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक चेतावनी ने इस मुद्दे को मुख्यधारा में ला दिया है। आमतौर पर साइबर ठगी के शिकार लोग सामाजिक शर्म या भय के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने से रिपोर्टिंग में इजाफा हो सकता है। इससे एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती चर्चा यह भी दर्शाती है कि नागरिक अब साइबर सुरक्षा को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं।

हाल के वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही साइबर अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा उपायों को समानांतर रूप से मजबूत करना अनिवार्य है। बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण, मजबूत पासवर्ड, संदिग्ध लिंक से दूरी और समय-समय पर बैंक खातों की निगरानी जैसे उपायों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।

प्रधानमंत्री की चेतावनी के बाद #CyberSafety का ट्रेंड होना इस बात का संकेत है कि डिजिटल सुरक्षा अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर जारी संवाद और जागरूकता अभियान से उम्मीद जताई जा रही है कि लोग अधिक सतर्क रहेंगे और साइबर अपराधियों के झांसे में आने से बचेंगे। सरकार, टेक कंपनियों और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाया जा सकता है। फिलहाल, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर बढ़ती सतर्कता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर सुरक्षा को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-