जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट में शासकीय अधिवक्ता की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने ने राज्य सरकार व महाधिवक्ता आफिस को तीन सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने के निर्देश दिए. सरकार को बीते दिन मंगलवार को नोटिस का जवाब देना था, लेकिन जवाब प्रस्तुत नहीं किया गयाए जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता योगेश सोनी ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में जारी नोटिस महाधिवक्ता कार्यालय सहित सभी संबंधित विधि अधिकारियों को दे दिए गए थे. जिन अधिकारियों ने नोटिस लेने से इनकार किया. उनका उल्लेख शपथ-पत्र में किया गया है. इसके बाद भी अब तक कोई जवाब पेश नहीं किया गया.
हाईकोर्ट ने मामले को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि अब महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्वयं राज्य सरकार की ओर से इस मामले में पक्ष प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. याचिका में महाधिवक्ता आफिस द्वारा जारी 25 दिसंबर की सूची को चुनौती दी गई है. इस सूची में कुल 157 सरकारी विधि अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन नियुक्तियों में नियमों का पालन नहीं किया गया. याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार सरकारी अधिवक्ता बनने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव आवश्यक है. इसके बावजूद कई ऐसे वकीलों को नियुक्त किया गया है जिनका अनुभव 10 वर्ष से कम है. अधिवक्ता योगेश सोनी ने बताया कि इस पद के लिए सैकड़ों वकीलों से निर्धारित फार्म में आवेदन लिए गए थे.
हालांकि आवेदन की जांच, मूल्यांकन व चयन की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई. न ही कोई मापदंड, अंक प्रणाली या चयन-अस्वीकृति के कारण जारी किए गए. यह याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर की गई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि महाधिवक्ता कार्यालय ने नियमों के विपरीत अर्हता पूरी नहीं करने वाले वकीलों को सरकारी अधिवक्ता नियुक्त किया है.

