जबलपुर. मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. CAG की जांच में लगभग 55 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन, खरीद प्रक्रिया, निर्माण कार्यों और विभिन्न मदों में खर्च को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं.
सूत्रों के अनुसार ऑडिट के दौरान विश्वविद्यालय के वित्तीय दस्तावेजों और व्यय विवरणों की विस्तृत जांच की गई. इस प्रक्रिया में पाया गया कि कई खर्च निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किए गए. कुछ मामलों में निविदा प्रक्रिया का समुचित पालन नहीं हुआ, जबकि कुछ भुगतान ऐसे कार्यों के लिए किए गए जिनका भौतिक सत्यापन स्पष्ट नहीं हो सका. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आंतरिक नियंत्रण प्रणाली कमजोर पाई गई, जिससे वित्तीय अनुशासन प्रभावित हुआ.
बताया जा रहा है कि उपकरणों की खरीद, निर्माण कार्यों और सेवा अनुबंधों में प्रक्रियात्मक त्रुटियां पाई गईं. कई फाइलों में अनुमोदन और भुगतान के बीच आवश्यक दस्तावेज अधूरे पाए गए. ऑडिट टीम ने इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है. विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रारंभिक जवाब में कहा गया है कि कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जा रहा है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे.
इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वित्तीय अनियमितता गंभीर चिंता का विषय है. विपक्ष ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं सत्तापक्ष के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि CAG की रिपोर्ट एक नियमित ऑडिट प्रक्रिया का हिस्सा है और सरकार पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है.
मेडिकल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यहां से प्रशिक्षित होने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी सीधे जनता के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं. यदि संसाधनों का सही उपयोग न हो तो इसका प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता और अधोसंरचना पर पड़ सकता है. कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालयों में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि खर्च की निगरानी रियल टाइम में हो सके.
छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालय में धन के उपयोग में अनियमितता हुई है तो इसका असर छात्रों की सुविधाओं पर पड़ा होगा. छात्र प्रतिनिधियों ने पारदर्शी जांच और परिणाम सार्वजनिक करने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और हॉस्टल सुविधाओं में सुधार के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने चाहिए.
रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य स्तर पर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है. विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि CAG द्वारा उठाए गए बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में प्रक्रिया संबंधी कमियां थीं, जिन्हें सुधारने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों की पारदर्शिता पर जनता की नजर रहती है. सोशल मीडिया पर भी इस रिपोर्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र बनाया जाएगा. कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालय की वित्तीय जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक पोर्टल पर साझा की जानी चाहिए.
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि वह CAG की आपत्तियों पर विधिवत जवाब प्रस्तुत कर रहा है और जहां आवश्यक होगा वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे. आधिकारिक स्तर पर यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संस्थान की साख बनाए रखने के लिए पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है.
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच और समीक्षा प्रक्रिया के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या जिम्मेदारी तय की जाती है. 55 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का यह मामला न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अहम परीक्षा बन गया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और खुलासे तथा प्रशासनिक निर्णय सामने आने की संभावना है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

