हॉलीवुड फिल्म द ब्लफ एक पीरियड एक्शन ड्रामा के रूप में दर्शकों के सामने आई है, जिसमें समुद्री डाकुओं, बदले और रहस्यमयी अतीत की पृष्ठभूमि बुनी गई है। फिल्म नई कहानी पेश करने में भले ही बहुत आगे न बढ़ पाए, लेकिन प्रियंका चोपड़ा जोनस के सशक्त अभिनय और प्रभावशाली एक्शन दृश्यों के कारण यह दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहती है। 3 स्टार रेटिंग के साथ यह फिल्म एक सीमित लेकिन मनोरंजक अनुभव प्रदान करती है।
फ्रैंक ई फ्लावर्स के निर्देशन में बनी यह फिल्म वर्ष 1846 की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी की शुरुआत कैप्टन टी एच बोडेन और उनकी टीम से होती है, जिन्हें निर्दयी समुद्री डाकू कैप्टन कॉनर बंधक बना लेता है। कॉनर को यकीन है कि उसका सोना उससे छीन लिया गया है और वह उसे वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। जब बोडेन कोई जानकारी देने से इनकार करता है, तो कॉनर अपनी सेना के साथ केमैन ब्रैक द्वीप की ओर बढ़ता है, जहां बोडेन का परिवार रहता है।
द्वीप पर बोडेन की पत्नी एरसेल, उनकी बहन एलिजाबेथ और बेटा इसाक रहते हैं। शुरुआत में एरसेल एक सामान्य मछुआरिन के रूप में दिखाई देती हैं, लेकिन जब कॉनर और उसके गुर्गे द्वीप पर हमला करते हैं, तब कहानी में बड़ा मोड़ आता है। एरसेल न केवल हमले का सामना करती हैं, बल्कि दुश्मनों को खत्म भी करती हैं। इसी दौरान यह रहस्य खुलता है कि एरसेल का अतीत एक पूर्व समुद्री डाकू के रूप में रहा है, जिसे ब्लडी मैरी के नाम से जाना जाता था। इसके बाद फिल्म बदले और टकराव की दिशा में आगे बढ़ती है।
कहानी का ढांचा सीधा-सादा है और इसमें चौंकाने वाले ट्विस्ट या सस्पेंस की कमी साफ नजर आती है। दर्शक आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है। हालांकि पटकथा गति बनाए रखती है और 106 मिनट की अवधि में फिल्म अनावश्यक विस्तार से बचती है। शुरुआत से ही घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ता है, जिससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत प्रियंका चोपड़ा जोनस का प्रदर्शन है। वह पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाती नजर आती हैं। एक्शन दृश्यों में उनकी ऊर्जा और स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है। कई दृश्यों में वह हॉलीवुड एक्शन नायिकाओं की श्रेणी में मजबूती से खड़ी दिखाई देती हैं। भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तरों पर उनका अभिनय संतुलित है। खासतौर पर एक्शन सीक्वेंस में उनका आत्मविश्वास और फुर्ती फिल्म को ऊंचाई देता है।
कैप्टन कॉनर के रूप में कार्ल अर्बन ने खलनायक की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाया है। उनका व्यक्तित्व किरदार के अनुरूप है और वह कहानी में आवश्यक खतरे का भाव पैदा करते हैं। इस्माइल क्रूज कॉर्डोवा ने सहायक भूमिका में संतुलित अभिनय किया है। सफिया ओकली-ग्रीन का प्रदर्शन औसत रहता है, जबकि वेदांतन नायडू अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, हालांकि उनके किरदार की शारीरिक अक्षमता कहानी में विशेष गहराई नहीं जोड़ पाती। अन्य कलाकारों ने छोटे लेकिन महत्वपूर्ण किरदारों को ईमानदारी से निभाया है।
तकनीकी पक्ष की बात करें तो सिनेमैटोग्राफी फिल्म की एक और मजबूत कड़ी है। द्वीप के दृश्य और समुद्री वातावरण को खूबसूरती से कैमरे में कैद किया गया है। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम्स समयकाल के अनुरूप हैं और फिल्म को प्रामाणिकता प्रदान करते हैं। एक्शन दृश्यों में हिंसा का स्तर थोड़ा तीखा है, लेकिन वह असहज करने की सीमा पार नहीं करता।
संगीत की बात करें तो हेनरी जैकमैन का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड के अनुरूप है। प्रियंका चोपड़ा द्वारा गाया गया इसाक्स लोरी गीत भावनात्मक स्पर्श देता है और फिल्म के संवेदनशील पक्ष को उभारता है। संपादन तेज और सटीक है, जिससे कहानी में ठहराव महसूस नहीं होता।
हालांकि फिल्म समुद्री डाकुओं की थीम के कारण दर्शकों को पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन जैसी फिल्मों की याद दिला सकती है, लेकिन द ब्लफ द्वीप आधारित घटनाओं के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है। फिर भी कहानी के स्तर पर यह फिल्म कुछ नया या अप्रत्याशित प्रस्तुत नहीं कर पाती।
कुल मिलाकर द ब्लफ एक ऐसी फिल्म है जो अपनी कहानी से ज्यादा अपने मुख्य किरदार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। जो दर्शक मजबूत महिला प्रधान एक्शन ड्रामा देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म संतोषजनक साबित हो सकती है। प्रियंका चोपड़ा जोनस का दमदार अभिनय और सधी हुई प्रस्तुति इस फिल्म को देखने लायक बनाती है, भले ही इसकी कहानी में नवीनता की कमी क्यों न हो।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

